बिहार सरकार में मंत्री लेशी सिंह ने कहा, "हमारी सरकार ने कभी भी ईर्ष्या और द्वेश की भावना से कोई कार्रवाई नहीं की है। आज भी सम्राट चौधरी के नेतृत्व में कोई काम द्वेश से नहीं किया जा रहा है। बंगला खाली कराने की कार्रवाई सरकारी नियम और प्रावधानों के अनुसार की जा रही है
Leshi Singh ने बिहार सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया कि सरकार की कार्यशैली किसी व्यक्ति, दल या राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के प्रति ईर्ष्या, द्वेष अथवा बदले की भावना पर आधारित नहीं है। उनके अनुसार राज्य सरकार हमेशा कानून, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और स्थापित सरकारी नियमों के अनुरूप निर्णय लेती रही है तथा वर्तमान में भी यही नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य निष्पक्ष और पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित करना है, इसलिए किसी भी कार्रवाई को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय उसके कानूनी और प्रशासनिक पक्ष को समझना चाहिए।
मंत्री ने यह भी कहा कि आज Samrat Choudhary के नेतृत्व में सरकार विकास, सुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही को प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है और किसी भी निर्णय में व्यक्तिगत या राजनीतिक द्वेष की भावना का कोई स्थान नहीं है। लेशी सिंह ने विशेष रूप से सरकारी बंगला खाली कराने की कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से सरकारी नियमों, प्रावधानों और निर्धारित प्रशासनिक मानकों के अनुसार की जा रही है।
उन्होंने बताया कि सरकारी आवास सार्वजनिक संपत्ति होते हैं और उनका आवंटन तथा उपयोग निर्धारित नियमों के अधीन होता है। जब किसी व्यक्ति की पात्रता समाप्त हो जाती है या नियमों के अनुसार आवास वापस लिया जाना आवश्यक होता है, तब संबंधित विभाग द्वारा विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करते हुए कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई किसी विशेष व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए नहीं होती, बल्कि सरकारी व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए की जाती है। मंत्री के अनुसार राज्य सरकार यह सुनिश्चित करती है कि सभी लोगों के साथ समान व्यवहार हो और किसी के साथ पक्षपात या भेदभाव न किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक निर्णयों को राजनीतिक विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है, क्योंकि ऐसे मामलों में सरकार केवल नियमों का पालन करती है।
लेशी सिंह ने जोर देकर कहा कि बिहार सरकार कानून के शासन में विश्वास रखती है और प्रत्येक निर्णय संविधान, सरकारी दिशा-निर्देशों तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अनुरूप लिया जाता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि बंगला खाली कराने जैसी कार्रवाई को प्रतिशोधात्मक कदम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के रूप में समझा जाना चाहिए, जिसका उद्देश्य सरकारी संसाधनों का उचित प्रबंधन और नियमों का समान रूप से पालन सुनिश्चित करना है।