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ट्रंप की कार्रवाई से भड़के पुतिन, अमेरिका को दी चेतावनी

अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Updated Fri, 24 Oct 2025 11:48 AM IST

अमेरिका और यूरोप ने रूस पर एक बार फिर आर्थिक शिकंजा कस दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूसी तेल उद्योग पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के अगले ही दिन यूरोपीय संघ (EU) ने भी रूस के खिलाफ नए आर्थिक कदमों का ऐलान किया। यह कदम यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए पुतिन पर दबाव बढ़ाने की संयुक्त कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

मास्को से मिली जानकारी के मुताबिक, यूरोपीय संघ ने अपने नवीनतम प्रतिबंधों में रूस के ऊर्जा, शिपिंग और वित्तीय लेनदेन क्षेत्रों को निशाना बनाया है। इससे रूस की तेल और गैस निर्यात क्षमता पर असर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं, अमेरिका ने बुधवार को रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों रोसनेफ्ट (Rosneft) और लुकोइल (Lukoil) पर सीधे प्रतिबंध लगाकर रूस की आय के प्रमुख स्रोत को चोट पहुंचाने की कोशिश की है।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इन प्रतिबंधों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। मास्को में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने अमेरिकी कदम को “अमित्र कार्रवाई” (unfriendly act) बताया और कहा कि यह सिर्फ रूस नहीं, बल्कि पूरे वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

पुतिन ने कहा,m“हमारे तेल और तेल उत्पादों की आपूर्ति घटने से वैश्विक बाजारों में कीमतें बढ़ेंगी। इसका असर अमेरिकी उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा। यह दबाव की राजनीति है, लेकिन रूस झुकने वाला देश नहीं है।” उन्होंने चेताया कि अमेरिका के ये कदम न केवल रूस-अमेरिका संबंधों को और नुकसान पहुंचाएंगे बल्कि ऊर्जा बाजारों को अस्थिर भी कर देंगे।

रूस के राष्ट्रपति ने दोहराया कि रूसी अर्थव्यवस्था इन प्रतिबंधों से चरमराने वाली नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि “कुछ असर जरूर पड़ेगा”, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि रूस की अर्थव्यवस्था मजबूत नींव पर खड़ी है और अब वह पश्चिमी निर्भरता से काफी हद तक मुक्त हो चुकी है।

पुतिन ने कहा,,“अमेरिकी प्रशासन की ऐसी कार्रवाई निश्चित रूप से रूस-अमेरिका संबंधों को नुकसान पहुंचाएगी। यह रूस पर दबाव बनाने की एक कोशिश है, लेकिन कोई भी स्वाभिमानी देश और स्वाभिमानी लोग दबाव में कोई फैसला नहीं लेते।”

इसी बीच, पुतिन ने यूक्रेन और उसके पश्चिमी समर्थकों को भी कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर यूक्रेन पश्चिमी देशों से मिले लंबी दूरी के हथियारों का इस्तेमाल करके रूस के अंदरूनी इलाकों में हमला करता है, तो यह तनाव को नए स्तर पर पहुंचा देगा।

पुतिन ने आगाह किया कि रूस की प्रतिक्रिया “बेहद गंभीर, बल्कि चौंकाने वाली” होगी। उनका यह बयान पश्चिमी देशों द्वारा यूक्रेन को नई सैन्य सहायता देने की घोषणाओं के बाद आया है।

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और यूरोप के इन संयुक्त प्रतिबंधों का असर वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर जल्द दिखाई दे सकता है। रूस दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है और उसके निर्यात पर कोई भी रुकावट बाजार में तेल की कीमतों को झटका दे सकती है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियों ने पहले ही चेताया है कि यदि रूसी तेल की आपूर्ति में गिरावट आती है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं।

अमेरिका और यूरोप के दोहरे प्रतिबंधों के बाद अब रूस और पश्चिम के बीच टकराव नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। पुतिन का बयान इस बात का संकेत है कि मास्को दबाव के आगे झुकने के मूड में नहीं है।
आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इन आर्थिक प्रहारों से रूस की नीतियों पर असर पड़ेगा या फिर पुतिन एक बार फिर पश्चिमी मोर्चे के खिलाफ तेल को हथियार बनाकर जवाब देंगे।

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