गंगा और यमुना ने खतरे के निशान पार कर दिया है। जलस्तर खतरे के बिंदु 84.734 मीटर के ऊपर पहुंच गया है। नदियों का उफान अभी जारी है। स्थिति काफी भयावह हो गई है। रविवार को गंगा का जलस्तर 86 मीटर के करीब पहुंच गया है। बांध में रिसाव के चलते शनिवार देर रात हड़कंप मचा रहा। बालू भरी बोरी डालकर बांध को बचाने की कवायद की जाती रही। गंगा और यमुना के किनारों पर स्थित दो दर्जन से अधिक मुहल्लों के हजारों घर जलमग्न हो गए हैं।
अब बाढ़ का पानी शहर के पाश इलाके अशोक नगर, राजापुर की तरफ बढ़ रहा है। पानी कम होने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को भोर से ही हो रही मूसलाधार बारिश ने स्थिति को और भी भयावह कर दिया है। बाढ़ राहत शिविर में भीड़ काफी बढ़ गई है। दस हजार से अधिक लोग शरण लिए हुए हैं। यह संख्या और भी बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश के मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' ने कहा, "मैंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और उन लोगों को बचाया जिनके घर जलमग्न हो गए हैं... उन्हें आवश्यक चिकित्सा सहायता और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है और जब वे घर लौटेंगे, तो उन्हें सूखा राशन भी उपलब्ध कराया जाएगा
वर्ष 2013 में गंगा का अधिकतम जलस्तर 86.8 मीटर तो यमुना का 86.6 मीटर तक पहुंचा था। रविवार रात गंगा का जलस्तर 85.80 तथा यमुना का 85.82 मीटर पहुंच गया था। मतलब यह कि 25-26 सेमी और पानी बढ़ने पर वर्ष 2013 का रिकार्ड टूट सकता है। वर्ष 2013 में बाढ़ का पानी लगभग एक माह तक टिका रह गया था, जिससे ज्यादा दिक्कत उत्पन्न हो गई थी
पिछले दो दिनों में तेजी से दोनों नदियों के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। इससे करीब एक हजार परिवारों को अपना आशियाना छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। इसके अलावा 27 गांवों के हजारों लोग नावों के सहारे आवागमन को मजबूर हैं।