केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर कहा, "यह एक प्रक्रिया का हिस्सा है। कोई भी बिना वजह किसी सांसद को गिरफ्तार नहीं कर सकता। ज़रूर कुछ तथ्य होंगे जिनके आधार पर यह कार्रवाई की गई है। ऐसी स्थिति में, मेरा मानना है कि सभी को न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए। अगर वे निर्दोष हैं, तो कोई उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकता, लेकिन अगर कोई दोषी है, क्योंकि यह मामला बहुत गंभीर है, और अगर कोई इसमें शामिल है, तो मुझे लगता है कि सच्चाई सामने आनी चाहिए, और इसके लिए जांच की एक प्रक्रिया है.कांग्रेस और उनके सहयोगी RJD जैसे दल जब सत्ता में होते हैं तो बदले की राजनीति करते हैं। NDA में, अगर कोई दोषी है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा, और अगर कोई निर्दोष है, तो उसे नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा
पूनिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को पटना पुलिस ने 31 वर्षों पुराने 1995 के संपत्ति विवाद/धोखाधड़ी मामले में देर रात उनके आवास से गिरफ्तार किया गया, जिसमें उन पर आरोप है कि उन्होंने एक मकान को धोखे से किराये पर लेकर बाद में अपने कार्यालय के रूप में उपयोग किया, जबकि मकान मालिक को सही जानकारी नहीं दी थी। इस मामले के संबंध में अदालत पहले कई मौकों पर उन्हें नहीं मिलने पर गिरफ्तारी वारंट जारी कर चुकी थी और उनके अनुपस्थित रहने पर संपत्ति कुर्की आदेश भी दिए थे, जिसके बाद पुलिस ने कोर्ट के निर्देश पर कार्रवाई की।
गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ तीव्र हो गईं। विपक्षी नेताओं, खासकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने पप्पू यादव की गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध व साजिश बताया है और आरोप लगाया है कि यह कारवाई बिहार सरकार तथा सत्ताधारी गठबंधन की आलोचना करने के कारण की गई, विशेषकर उन्होंने हाल ही में पटना में NEET छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले पर आवाज उठाई थी। विपक्ष का दावा है कि यह गिरफ्तारी “आवाज दबाने की कोशिश” है, न कि सिर्फ कानूनी कार्रवाई।
दूसरी ओर, राज्य सरकार और सत्ताधारी दलों (बीजेपी-जेडीयू) ने स्पष्ट किया है कि गिरफ्तारी कोर्ट के आदेश के अनुरूप की गई है और इसे राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए। उनका है कि कानून सभी के लिए समान रूप से लागू होता है और किसी प्रकार की साजिश नहीं है।
गिरफ्तारी के दौरान पप्पू यादव की तबीयत भी बिगड़ी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक जांच के बाद उनका इलाज चल रहा है। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत के लिए कोर्ट में पेश किया गया, और दो दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, जहाँ से आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। अगली कोर्ट तारीख पर हिरासत और अग्रिम मुद्दों पर फैसला होने की संभावना है, जिसमें उनकी जमानत की याचिका और अन्य विधिक दलीलों पर भी सुनवाई होगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में कटु बहस, आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है, जिससे देशभर में राजनीतिक हलचल और चर्चाएँ तेज हुई हैं। विपक्ष इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए सरकार पर निशाना साध रहा है, जबकि सरकार इसे न्यायिक प्रक्रिया का पालन करार दे रही है।