3 अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को खत्म करने के लिए इस्तांबुल में हुई शांति वार्ता बिना किसी ठोस समाधान के समाप्त हो गई है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तारड़ ने बुधवार को बताया कि दोनों देशों के बीच हुई यह बातचीत किसी व्यवहारिक समझौते तक नहीं पहुंच सकी। यह वार्ता 25 अक्तूबर से तुर्किये और कतर की मध्यस्थता में चल रही थी। दोनों पड़ोसी देशों के बीच यह बैठक 19 अक्तूबर को दोहा में हुई युद्धविराम सहमति के बाद आयोजित की गई थी। लेकिन लगातार मतभेदों और आरोप-प्रत्यारोप के चलते वार्ता बेनतीजा रही।पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तालिबान पर दिल्ली के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है। आसिफ ने धमकी दी है कि इस्लामाबाद पर किसी भी हमले का करारा जवाब दिया जाएगा, जो 50 गुना ज्यादा बड़ा होगा। पाकिस्तानी न्यूज चैनल जियो न्यूज के एक कार्यक्रम में आसिफ ने काबुल के तालिबान शासन के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली और उसे भारत की कठपुतली कहा। आसिफ की टिप्पणी अफगान तालिबान की धमकी के बाद आई है, जिसमें कहा गया है कि अगर अफगानिस्तान के किसी हिस्से में हमला होता है तो इस्लामाबाद को निशाना बनाया जाएगा।
आसिफ ने कार्यक्रम में कहा, काबुल में कठपुतली का तमाशा चलाने वाले और कठपुतली का तमाशा करने वाले लोग दिल्ली से नियंत्रित हैं। आसिफ की तिलमिलाहट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने यह तक कह दिया कि भारत पश्चिमी सीमा पर अपनी हार की भरपाई करने के लिए अफगानिस्तान का इस्तेमाल कर रहा है। तालिबान की धमकियों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, अगर अफगानिस्तान ने इस्लामाबाद की तरफ आंख उठाई तो हम उसकी आंखें निकाल लेंगे।'आसिफ ने तुर्की में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हालिया वार्ता के विफल होने के लिए भी अफगान पक्ष और भारत को जिम्मेदार ठहराया। आसिफ ने कहा जब भी हम किसी समझौते के करीब पहुंचते और वार्ताकार काबुल पहुंचते, तो हस्तक्षेप होता और समझौता वापस ले लिया जाता। उन्होंने अफगान प्रतिनिधिमंडल की बातचीत के लिए तारीफ की लेकिन काबुल पर भारत के असर में आकर बाधा डालने का आरोप लगाया।आसिफ ने कहा कि भारत पाकिस्तान के साथ कम तीव्रता वाला युद्ध लड़ना चाहता है। इसके लिए वह काबुल का इस्तेमाल कर रहा है। इसके पहले तुर्की और कतर की मध्यस्थता में पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच सोमवार को हुई बातचीत बिना किसी सफलता के समाप्तह हो गई। हालांकि, मध्यस्थों ने कहा कि निरंतर बातचीत महत्वपूर्ण है। इसके पहले आसिफ ने चेतावनी दी थी कि अफगानिस्तान के साथ वार्ता नाकाम रहने पर अफगानिस्तान के साथ खुली जंग छिड़ सकती है।पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने शनिवार को कहा था कि अगर इस्तांबुल वार्ता में कोई समझौता नहीं हुआ तो “खुला युद्ध शुरू हो सकता है।
हालांकि, युद्धविराम की घोषणा के बावजूद, सीमा क्षेत्र में झड़पें जारी हैं, जिसमें हाल ही में पांच पाकिस्तानी सैनिक और 25 तालिबान लड़ाके मारे गए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह असफल वार्ता दक्षिण एशिया में स्थायी शांति की उम्मीदों को कमजोर कर सकती है और दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।आसिफ ने आरोप लगाया कि भारत चाहता है कि पाकिस्तान के खिलाफ कम तीव्रता वाला युद्ध (Low Intensity War) जारी रहे और अफगानिस्तान उसका जरिया बना हुआ है. उन्होंने कहा, “भारत ने अपनी पश्चिमी सीमा पर हार के बाद अब काबुल के जरिए पाकिस्तान को अस्थिर करने की रणनीति अपनाई है.” सूत्रों के मुताबिक, तुर्की और कतर की मध्यस्थता में हुई वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हुई. पाकिस्तान की मुख्य मांग थी कि अफगानिस्तान अपने क्षेत्र में सक्रिय तेहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ प्रमाणिक कार्रवाई करे. इस मुद्दे पर पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ता उल्लाह तारड़ ने भी कहा कि इस्तांबुल वार्ता में अफगान पक्ष मूल मुद्दे से बार-बार भटकता रहा और जिम्मेदारी लेने से बचता रहा. पिछले कुछ हफ्तों में सीमा पर हुई झड़पों में कई सैनिकों और नागरिकों की मौत हो चुकी है, जिससे दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति बन गई थी. हालांकि 19 अक्टूबर को कतर की मध्यस्थता में दोहा में अस्थायी युद्धविराम हुआ, लेकिन यह तनाव को स्थायी रूप से खत्म नहीं कर पाया. ख्वाजा आसिफ ने सख्त लहजे में कहा, “अगर अफगानिस्तान ने इस्लामाबाद की ओर आंख उठाई भी तो हम उसकी आंखें निकाल देंगे. अफगानिस्तान को यह समझ लेना चाहिए कि पाकिस्तान किसी भी कीमत पर अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा.”