नीट यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा के दिन दो ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने लाखों छात्रों और अभिभावकों का ध्यान खींचा। एक तस्वीर पश्चिम बंगाल की छात्रा सृष्टि दुबे की थी, जिन्होंने गंभीर चोटों के बावजूद परीक्षा देने का हौसला नहीं छोड़ा। दूसरी तस्वीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस फैसले की थी, जिसमें उन्होंने छात्रों की सुविधा को प्राथमिकता दी।
14 जून को एक सड़क दुर्घटना में सृष्टि दुबे की नौ पसलियां टूट गई थीं। उन्हें सर्जरी से गुजरना पड़ा और वह अभी भी कृत्रिम ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। बावजूद इसके उनका सपना सिर्फ एक था- हर हाल में नीट परीक्षा देना। सृष्टि के माता-पिता ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से संपर्क कर बेटी के लिए विशेष व्यवस्था की मांग की।
शिक्षा मंत्री के हस्तक्षेप के बाद परीक्षा केंद्र पर सृष्टि के लिए अलग कमरे की व्यवस्था की गई। मेडिकल टीम, एंबुलेंस और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, ताकि वह अस्पताल के कपड़ों और मेडिकल उपकरणों के साथ भी परीक्षा दे सकें। आज सृष्टि ऑक्सीजन सपोर्ट के बीच परीक्षा दे रही हैं और उनका जज्बा लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बन गया है। इस मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान की बातचीत की एक वीडियो भी सामने आई है। जरा देखिए ये वीडियो।
वहीं, नीट परीक्षा के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचे। लेकिन सीधे अपने आवास जाने के बजाय उन्होंने एयरपोर्ट पर ही इंतजार करने का फैसला किया। दोपहर 2 बजे नीट परीक्षा शुरू होनी थी और बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा केंद्रों की ओर जा रहे थे।
प्रधानमंत्री ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनके काफिले की वजह से छात्रों को ट्रैफिक या आवाजाही में किसी तरह की परेशानी न हो, परीक्षा शुरू होने के बाद ही अपने आवास के लिए प्रस्थान किया।
नीट परीक्षा के दिन सामने आई ये दोनों तस्वीरें एक महत्वपूर्ण संदेश देती हैं- अगर इरादे मजबूत हों तो मुश्किलें भी रास्ता नहीं रोक सकतीं और जब व्यवस्था छात्र हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है, तो संवेदनशील प्रशासन की एक सकारात्मक मिसाल बनती है।