कल तक जिस पार्टी के नाम से लोग अनजान थे, वो एनसीपीआई पार्टी अचानक से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है। रविवार को टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने एनसीपीआई में विलय का एलान किया।
लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की और अलग पहचान की मांग भी कर दी, लेकिन कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब जिस पार्टी में विलय का दावा किया गया, उसके संस्थापक और राष्ट्रीय संगठन सचिव शांतनु दे ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए मिली।
शांतनु दे ने कहा कि उन्हें अब तक इस संबंध में कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के बारे में खबरों के माध्यम से जाना, हालांकि अगर कोई बातचीत करना चाहता है तो वह उसके लिए तैयार हैं। उनका कहना था कि किसी भी राजनीतिक विस्तार का स्वागत किया जा सकता है, लेकिन उसके लिए संवैधानिक और संगठनात्मक प्रक्रिया का पालन जरूरी है।
शांतनु दे ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी अध्यक्ष द्वारा इस फैसले पर उनसे अब तक कोई चर्चा नहीं की गई। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे बातचीत होगी और यदि जरूरत पड़ी तो दिल्ली जाकर संबंधित नेताओं से मुलाकात भी की जाएगी। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी जल्द इस पूरे मामले पर अपना आधिकारिक पक्ष प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सामने रख सकती है।
वहीं शांतनु दे ने खुलकर कहा कि उनकी पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और एनडीए के कई दृष्टिकोणों का समर्थन करती है और देशहित के मुद्दों पर साथ काम करने की इच्छा रखती है।
साल 2023 में पंजीकृत एनसीपीआई को 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में कुल 822 वोट ही मिले थे... हालांकि, एक साथ 20 सांसदों के जुड़ने से पार्टी की चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है।