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Naravane Book Controversy Row: एमएम नरवणे की किताब पर सियासी घमासान,जाएगी राहुल की संसदीय सदस्यता?

Wed, 11 Feb 2026 03:30 AM IST
भास्कर तिवारी वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, "पब्लिशर पेंगुइन इंडिया ने ट्वीट करके बताया है कि ऐसी किसी प्रकार की किताब किसी भी रूप में नहीं छपी है। जब किताब छपी ही नहीं, तो राहुल गांधी को यह कैसे मिली? राहुल गांधी में अगर हिम्मत है तो वो पूरी किताब दिखाएं.उनको देश से माफी मांगनी चाहिए और मेरी लोकसभा स्पीकर से मांग है कि उनकी सदस्यता रद्द करने के लिए कोशिश करनी चाहिए, आदेश देना चाहिए

भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, "पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे द्वारा जो पेंगुइन द्वारा किए गए कल के ट्वीट को सपोर्ट करना, अब यह स्पष्ट हो गया है कि राहुल गांधी ने जिस मनोहर कहानी को सुनाने का प्रयास सदन के पटल पर किया था, वो उनकी उस तथाकथित प्रकाशित किताब के प्रकाशक और लेखक, दोनों के द्वारा स्पष्ट रूप से ध्वस्त हो गया है। पेंगुइन ने भी यह कहा है कि ऐसी कोई किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है और अगर किसी के पास ऐसी किताब की प्रति है, तो वह पूरी तरह से अलग है और वो कॉपीराइट का उल्लंघन है

भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा, "आज पेंगुइन ने एक बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने साफ़ तौर पर कहा है कि जनरल नरवणे की जो आत्मकथा है, उसका अभी तक कोई प्रकाशन नहीं हुआ है, किसी भी रूप में प्रकाशन नहीं हुआ है.उन्होंने(पेंगुइन ने) यह भी कहा है कि यह कॉपीराइट का उल्लंघन है और वो इसके लिए उचित कार्रवाई करेंगे.यह स्पष्ट है कि अपनी चाल और चरित्र के अनुसार राहुल गांधी ने फिर देश के सामने झूठ फैलाया है। वो जिस किताब को लेकर घूम रहे थे, वो किताब फर्जी है, वो छपी नहीं है...राहुल गांधी ने संसदीय परंपरा और कानून सबका उल्लंघन किया है। हम उनकी भर्त्सना करते हैं। उनको देश से माफी मांगनी चाहिए

पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की हालिया किताब को लेकर देश की राजनीति में घमासान मच गया है। किताब में किए गए कुछ कथित उल्लेखों और टिप्पणियों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। खास तौर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम इस विवाद के केंद्र में है, जिसके बाद यह सवाल जोर पकड़ने लगा है कि क्या इस मामले का असर उनकी संसदीय सदस्यता पर भी पड़ सकता है। 

राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि अगर किताब में किए गए दावे और उनसे जुड़ी प्रतिक्रियाएं संसद की गरिमा या संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान के खिलाफ जाती हैं, तो इस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं कांग्रेस इसे एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश बता रही है और आरोप लगा रही है कि पूर्व सैन्य अधिकारी की किताब को आधार बनाकर विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। राहुल गांधी के समर्थकों का कहना है कि उनकी बातों को बार-बार तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में सवाल पूछना या आलोचना करना अपराध नहीं हो सकता।

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