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Mani Shankar Aiyar Controversy:कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के विवादित बयान से सियासी बवाल!

Sun, 15 Mar 2026 02:11 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

मणिशंकर अय्यर द्वारा जयपुर में दिया गया एक बयान हाल ही में राजनीतिक बहस और विवाद का विषय बन गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अय्यर ने भारत-पाकिस्तान संबंधों, देश की ऐतिहासिक स्थिति और वर्तमान व्यवस्था को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर भारत की व्यवस्था में वास्तव में हिम्मत है, तो उसे केवल बयानबाज़ी करने के बजाय पाकिस्तान से सीधे और गंभीर स्तर पर बातचीत करनी चाहिए। अय्यर के अनुसार, भारत को चाहिए कि वह प्रतिनिधियों को Islamabad भेजकर महीनों तक पाकिस्तान के साथ बैठकर बातचीत करे और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को कूटनीतिक तरीके से हल करने की कोशिश करे। उनका कहना था कि युद्ध या टकराव की नीति से कोई स्थायी समाधान नहीं निकलता, इसलिए संवाद ही सबसे प्रभावी रास्ता है।

अपने भाषण के दौरान अय्यर ने भारत के इतिहास का भी उल्लेख किया और कहा कि भारत को “सोने की चिड़िया” और एक समृद्ध आर्थिक शक्ति के रूप में पहचान मुख्यतः Mughal Empire के दौर में मिली थी। उनके इस कथन ने भी विवाद को जन्म दिया, क्योंकि कई राजनीतिक दलों और इतिहासकारों का मानना है कि भारत की आर्थिक और सांस्कृतिक समृद्धि केवल मुगल काल तक सीमित नहीं थी, बल्कि उससे पहले भी भारत व्यापार, कृषि, शिल्प और ज्ञान परंपरा के कारण दुनिया की प्रमुख सभ्यताओं में गिना जाता था। अय्यर के बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया, जिसमें सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने उनकी टिप्पणी की कड़ी आलोचना की और इसे भारत की ऐतिहासिक उपलब्धियों को कम करके दिखाने वाला बयान बताया। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि अय्यर का आशय भारत-पाकिस्तान के बीच संवाद और शांति की आवश्यकता पर जोर देना था, जिसे राजनीतिक रूप से अलग-अलग तरह से प्रस्तुत किया जा रहा है।

यह पहली बार नहीं है जब मणिशंकर अय्यर के बयान विवाद का कारण बने हों। इससे पहले भी वे कई बार तीखी और असामान्य टिप्पणियों के कारण राजनीतिक सुर्खियों में रहे हैं। जयपुर में दिया गया उनका यह बयान भी उसी कड़ी में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने भारत की विदेश नीति, पड़ोसी देशों के साथ संबंध और इतिहास की व्याख्या को लेकर अपने विचार खुले तौर पर रखे। इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल में बहस तेज हो गई है और विभिन्न दलों के नेता इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुल मिलाकर, अय्यर की टिप्पणी ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संबंधों, इतिहास की व्याख्या और राजनीतिक बयानबाज़ी की सीमाओं को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को जन्म दे दिया है।

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