राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने तेजी से कार्रवाई करते हुए चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जबकि मामले में चार लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। इस हादसे में कई छात्र-छात्राओं की मौत और अनेक लोगों के घायल होने के बाद प्रदेश सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हादसे के समय मुख्यमंत्री अलीगढ़ के दौरे पर थे और एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें अलीगंज में आग लगने की सूचना मिली। घटना की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने मंच से ही लोगों को इसकी जानकारी दी और अपने सभी निर्धारित कार्यक्रम तत्काल प्रभाव से रद्द करने की घोषणा कर दी। इसके बाद मुख्यमंत्री सीधे लखनऊ के लिए रवाना हो गए। राजधानी पहुंचने से पहले ही उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों में पूरी तत्परता बरतने के निर्देश जारी कर दिए थे। मुख्यमंत्री ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित वरिष्ठ अधिकारियों को घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति की निगरानी करने और घायलों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आदेश दिया।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग और स्वास्थ्य विभाग की टीमें तुरंत सक्रिय हुईं और राहत कार्यों को तेज किया गया। घटनास्थल पर पहुंचकर मुख्यमंत्री ने स्वयं हालात का जायजा लिया तथा अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा दिलाई जाएगी। सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा भी की है तथा घायलों के समुचित उपचार के निर्देश दिए हैं। इस बीच प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही घटना से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने पहले ही विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर मामले की गहन जांच के आदेश दिए हैं और सात दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। सरकार का कहना है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।