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Jagannath Rath Yatra: जगन्नाथ हैं, तो जीवन है! भगवान Jagannath रथ यात्रा पर क्या बोले PM Modi?

Fri, 27 Jun 2025 12:21 PM IST
आकाश शर्मा वीडियो डेस्क अमर उजाला

ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की शुरुआत हो रही है। यह भव्य यात्रा पुरी के जगन्नाथ मंदिर से शुरू होकर गुंडिचा मंदिर तक जाती है। जगन्नाथ रथ यात्रा में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। 12 दिन चलने वाली रथ यात्रा को लेकर भक्त उत्साहित हैं। वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पीएम नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को जगन्नाथ रथ यात्रा की शुभकामनाएं दी है। 

आप को बता दे कि रथ यात्रा से एक दिन पहले हजारों की संख्या में भक्तों ने मंदिर के सिंह द्वार पर पहुंचकर रत्न बेदी (गर्भगृह में पवित्र मंच) पर भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के नबाजौबन दर्शन (युवा रूप) किए। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ साल में एक बार अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाते हैं। यह रथ यात्रा कुल 12 दिनों तक चलेगी और इसका समापन 8 जुलाई 2025 को नीलाद्रि विजय के साथ होगा, जब भगवान पुनः अपने मूल मंदिर में लौटेंगे। हालांकि रथ यात्रा का आयोजन 12 दिनों का होता है, इसकी तैयारियां महीनों पहले से शुरू हो जाती हैं। इस रथ यात्रा के दौरान कई धार्मिक रस्में, अनुष्ठान और विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के पवित्र अवसर पर सभी देशवासियों को मेरी ढेरों शुभकामनाएं। श्रद्धा और भक्ति का यह पावन उत्सव हर किसी के जीवन में सुख, समृद्धि, सौभाग्य और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए, यही कामना है। जय जगन्नाथ!

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को देशवासियों को जगन्नाथ रथ यात्रा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने एक्स पर लिखा कि पवित्र रथ यात्रा के अवसर पर मैं देश-विदेश में रह रहे महाप्रभु जगन्नाथ के भक्तों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देती हूं। रथ पर विराजमान बड़े ठाकुर बलभद्र, महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, देवी सुभद्रा और चक्रराज सुदर्शन के दर्शन करके लाखों भक्त दिव्य अनुभूति प्राप्त करते हैं। इन ईश्वरीय स्वरूपों की मानवीय लीला ही रथ यात्रा की विशेषता है। इस पुण्य अवसर पर महाप्रभु श्रीजगन्नाथ से मेरी यह प्रार्थना है कि पूरे विश्व में शांति, मैत्री और स्नेह का वातावरण रहे।

तो वहीं पुरी से भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि अनादि काल से यह माना जाता है कि भगवान जगन्नाथ स्वयं यहां निवास करते हैं और यहीं से वे ब्रह्मांड का संचालन करते हैं। 'स्नान पूर्णिमा' के बाद, पारंपरिक रूप से, भगवान बीमार पड़ जाते हैं और उनका इलाज किया जाता है। और आज, वे गुंडिचा मंदिर (अपनी मौसी के निवास) के लिए रवाना होंगे, जो 3 किमी दूर है। यह ओडिशा के लोगों द्वारा निभाई जाने वाली एक सुंदर परंपरा है... भगवान स्वयं अपने भक्तों को 'दर्शन' देने के लिए निकलते हैं। 

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