हिंद महासागर क्षेत्र में ईरान के युद्धपोत IRIS Dena पर कथित रूप से अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा किए गए हमले को लेकर भारतीय राजनीति में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। इस घटना पर AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केन्द्र सरकार से कई सवाल पूछे और स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की। ओवैसी ने कहा कि यह घटना केवल ईरान और अमेरिका के बीच का मामला नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरे हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा और भारत की रणनीतिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत सरकार इस गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है, जबकि देश को अपनी विदेश नीति और समुद्री सुरक्षा के बारे में स्पष्ट रुख दिखाना चाहिए।
ओवैसी ने केन्द्र सरकार से मांग की कि इस पूरे मामले पर आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देश को बताया जाए कि भारत का रुख क्या है और सरकार इस घटना को किस नजर से देख रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस क्षेत्र में यह हमला हुआ, वह हिंद महासागर का संवेदनशील इलाका है और यहां भारत की सुरक्षा और रणनीतिक हित जुड़े हुए हैं। ऐसे में अगर किसी विदेशी शक्ति की पनडुब्बी वहां हमला करती है तो यह भारत के लिए भी चिंता का विषय होना चाहिए। ओवैसी ने सवाल उठाया कि अगर भविष्य में चीन भी इसी तरह भारतीय समुद्री क्षेत्र के आसपास सक्रिय हो जाए तो भारत की प्रतिक्रिया क्या होगी।
इसके अलावा उन्होंने क्वाड (Quad) जैसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा समूह की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं और इसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग के लिए बनाया गया है। ओवैसी ने पूछा कि जब इस क्षेत्र में इतना बड़ा सैन्य घटनाक्रम हुआ है तो क्वाड की भूमिका और प्रभाव क्या है। उन्होंने कहा कि अगर इस तरह की घटनाएं बिना किसी स्पष्ट प्रतिक्रिया के होती रहेंगी तो इससे क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ सकता है और भविष्य में बड़ी रणनीतिक चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
ओवैसी ने यह भी कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि भारत इस मुद्दे पर कूटनीतिक स्तर पर क्या कदम उठा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां आने वाले समय में बड़े संघर्ष का कारण बन सकती हैं, इसलिए भारत को सक्रिय और स्पष्ट विदेश नीति अपनानी चाहिए। उनके अनुसार, सरकार की जिम्मेदारी है कि वह देश की सुरक्षा, समुद्री हितों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को ध्यान में रखते हुए जनता के सामने अपना दृष्टिकोण रखे।
इस तरह ईरानी जहाज पर हुए हमले को लेकर ओवैसी ने केन्द्र सरकार से जवाबदेही, पारदर्शिता और स्पष्ट नीति की मांग करते हुए सरकार की चुप्पी पर सवाल खड़े किए हैं।