अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कतर की सिफारिश पर ईरान और इजराइल के बीच सीजफायर कराया है. यह खुलासा मैगजीन न्यूजवीक ने अमेरिकी राजनयिक सूत्रों के हवाले से किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने जैसे ही कतर पर मिसाइलें दागीं, वैसे ही कतर के अमीर और प्रधानमंत्री अमेरिका की तरफ देखने लगे.न्यूजवीक ने अमेरिकी राजदूत के हवाले से कहा कि कतर की सिफारिश पर ट्रंप ने मध्यपूर्व के अपने दूत विटकॉफ से बात की. विटकॉफ ने इसके बाद ईरानी समकक्ष को फोन मिलाया.
Axios ने व्हाइट हाउस के सूत्रों के हवाले से बताया है कि जैसे ही विटकॉफ ने ईरान के विदेश मंत्री को फोन लगाया. वैसे ही विदेश मंत्री ने शर्त रख दी. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघाची का कहना था कि इजराइल हमला रोकेगा, तभी बात बन सकती है.अराघाची के मुताबिक जंग की शुरुआत इजराइल ने की थी. हमला रोकना भी उसी का काम है. इजराइल हमला रोकता है तब हम भी हमला नहीं करेंगे. फोन पर विटकॉफ ने ईरान को यह भरोसा दिलाया कि इजराइल अगले 24 घंटे बाद हमला नहीं करेगा. ईरान के विदेश मंत्री से फोन पर बात करने के बाद विटकॉफ ने अपना संदेश व्हाइट हाउस को भेज दिया.
इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने सीजफायर की घोषणा की.व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बातचीत के जरिए इजरायल और ईरान के बीच युद्ध विराम की मध्यस्थता की, जबकि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस सहित उनकी टीम ने तेहरान के साथ बातचीत की। नाम न बताने की शर्त पर युद्ध विराम का विवरण देते हुए अधिकारी ने कहा कि इजरायल ने एक शर्त रखी और कहा कि वे सीजफायर पर सहमत है, उनकी शर्त ये थी कि ईरान नए हमले न करे।आखिर कैसे हुई सीजफायर की बात ....अधिकारी ने कहा कि ईरान ने संकेत दिया है कि आगे कोई हमला नहीं होगा। अधिकारी ने कहा कि ईरान के साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष संचार में वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ शामिल थे