दिल्ली में छात्रों के आंदोलन के समर्थन में मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भंवरकुआं स्थित धरना स्थल पर उस समय राजनीतिक माहौल गर्म हो गया, जब मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मिलने पहुंचे। दोनों नेताओं ने छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और उन्हें हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आंदोलन कर रहे छात्रों को किसी भी प्रकार से प्रताड़ित किया गया या उनकी आवाज दबाने की कोशिश की गई, तो कांग्रेस पार्टी उनके समर्थन में सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि छात्रों का अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाना उनका अधिकार है और सरकार को उनकी बात गंभीरता से सुननी चाहिए। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश में शिक्षा की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है और विशेष रूप से डबल इंजन सरकार वाले राज्यों में हालात अधिक चिंताजनक हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि देशभर में लगभग एक लाख स्कूल बंद कर दिए गए हैं, जिसके कारण करीब दो करोड़ बच्चों ने शिक्षा प्राप्त करना छोड़ दिया है। उनके अनुसार, शिक्षा किसी भी देश के विकास की सबसे मजबूत नींव होती है, लेकिन सरकार इस क्षेत्र की लगातार उपेक्षा कर रही है। दिग्विजय सिंह ने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार ने शिक्षा बजट में कटौती की है, जिससे सरकारी स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। उन्होंने हाल के वर्षों में सामने आए पेपर लीक मामलों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता लगातार सवालों के घेरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में ओएमआर शीट बदले जाने जैसी गंभीर शिकायतें सामने आई हैं, लेकिन जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि बार-बार पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों की घटनाएं सामने आ रही हैं तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा और दोषियों पर कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार पारदर्शिता अपनाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके।