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India Maldives Ties: Bharat की ‘फिनटेक डिप्लोमेसी’ का कमाल, UPI से भी जुड़ें दोनों देश | UPI

वीडियो डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 26 Jul 2025 02:08 AM IST


पीएम मोदी अपनी दो दिवसीय यात्रा पर आज मालदीव पहुंचे हैं। इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मालदीव के 60वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मालदीव  यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, मालदीव के स्वतंत्रता दिवस के 60 साल पूरे होने पर भारत की ओर से शुभकामनाएं. इस ऐतिहासिक अवसर पर मुझे मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाने के लिए मैं राष्ट्रपति मुइज्जू का आभार प्रकट करता हूं.’ उन्होंने आगे कहा, ‘भारत और मालदीव के संबंध 60 साल के नहीं, सदियों पुराने हैं. आज जो डाक टिकट जारी हुआ, वो बताता है कि हम केवल पड़ोसी नहीं, एक-दूसरे के सहयात्री हैं.’

वहीं दूसरी तरफ भारत की डिजिटल पेमेंट क्रांति अब सीमाओं से परे पहुंच रही है। यानी मिलो दूर दूसरे देश में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी की पहुंच अब मालदीव तक भी हो गई है।साल 2024 में भारत और मालदीव के बीच अगस्त में एक समझौता हुआ था, जिसके तहत मालदीव में UPI प्रणाली को लागू करने पर सहमति बनी थी। इस MoU पर भारत के एनपीसीआई इंटरनेशनल और मालदीव की प्रमुख डिजिटल कंपनी TradeNet Maldives Corporation के बीच हस्ताक्षर हुए थे। अब, जुलाई 2025 में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही तकनीकी और ऑपरेशनल कार्य पूरे हो जाएंगे, मालदीव में लोग UPI का इस्तेमाल कर सकेंगे। यानी अब बहुत जल्द मालदीववासी और भारत से जाने वाले पर्यटक, दोनों UPI से भुगतान कर पाएंगे।

दूसरी ओर, मुइज्जू ने मालदीव को उसकी आर्थिक चुनौतियों से निपटने में सहायता देने में भारत की "महत्वपूर्ण भूमिका" की सराहना की। उन्होंने कहा, "आवश्यक वस्तुओं के निर्यात के माध्यम से मालदीव को भारत की निरंतर सहायता दीर्घकालिक व्यापार समझौते के तहत हमारे द्विपक्षीय सहयोग का एक प्रमुख पहलू है।"विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि मोदी-मुइज्जू वार्ता के बाद हस्ताक्षरित एक प्रमुख समझौते का मकसद मालदीव की ओर से भारत को दिए जाने वाले वार्षिक ऋण भुगतान में 40 प्रतिशत की कमी करना है। ऐसा माना जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में चीन के बढ़ते आक्रामक व्यवहार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसके प्रभाव पर चर्चा हुई।
 

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