डीएम मेडिकल कॉलेज का दौरा करते रहे और इमरजेंसी वार्ड के बाहर दो लोग तड़प-तड़प कर मर गए। मामला मेरठ मेडिकल कॉलेज का है। इलाज में कथित देरी के चलते मरने वालों के नाम हैं, बागपत जिले के मऊ निवासी अमरपाल और मेरठ जिले के लिसाड़ी निवासी एहसान। चिकित्सकों का कहना है कि वे वेंटिलेटर न होने की वजह से एहसान को भर्ती करने से पहले ही मना कर चुके थे। मेडिकल कॉलेज की दुर्दशा का आलम यह था कि अंदर और बाहर मरीज तड़प रहे थे, लेकिन इन मरीजों को देखने वाला कोई नहीं था। एक मरीज की हालत गंभीर देख खुद डीएम जगतराज त्रिपाठी ने स्ट्रेचर मंगाकर उसे भर्ती कराया। इसके अलावा मेरठ जिले के दौराला थाने निवासी गांव कैली की 22 वर्षीय प्रीति को लेकर उसका भाई राहुल जब ओपीडी पहुंचा तब डॉक्टरों ने उसकी हालत गंभीर बताते हुए उसे इमरजेंसी ले जाने को कहा। ओपीडी से इमरजेंसी तक की 800 मीटर की दूरी के दौरान वह चीखता-चिल्लाता रहा, लेकिन स्ट्रेचर तक की सुविधा नहीं मिली। वह चीखता-चिल्लाता बहन को गोद में लेकर ओपीडी से इमरजेंसी तक पहुंचा।