फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Himanta Biswa Sarma vs Pawan Khera: पवन खेड़ा के वकील ने तेलंगाना HC में दी ये दलीलें!

Fri, 10 Apr 2026 09:36 PM IST
Adarsh Jha अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी से जुड़े कथित ‘पासपोर्ट विवाद’ में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ी राहत मिली है। तेलंगाना हाईकोर्ट ने खेड़ा को एक हफ्ते की अग्रिम जमानत देते हुए गिरफ्तारी से अस्थायी सुरक्षा प्रदान की है। खेड़ा पर मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप लगे हैं, लेकिन अदालत ने उन्हें संबंधित कोर्ट में अपील करने का समय दिया है। अभिषेक मनु सिंघवी ने ऐसी क्या दलील दी की झट से मान गईं HC जज?आखिर क्या है पूरा मामला और इसकी वजह से क्यों गरमाई सियासत?

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी से जुड़े विवाद में बड़ी राहत मिली है। तेलंगाना हाईकोर्ट ने शुक्रवार को खेड़ा को एक हफ्ते की अग्रिम जमानत प्रदान की है। यह राहत उन्हें असम पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के मामले में गिरफ्तारी से अस्थायी सुरक्षा देती है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता को संबंधित अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन करने हेतु एक सप्ताह का समय दिया जाता है। साथ ही, इस अवधि के दौरान उन्हें कुछ शर्तों के साथ अंतरिम राहत प्रदान की गई है। यह आदेश जस्टिस के. सुजना की पीठ द्वारा सुनाया गया, जिन्होंने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।

यह मामला मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक और मानहानिकारक आरोप लगाने से जुड़ा है। दरअसल, पवन खेड़ा ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि रिंकी भुइयां सरमा के पास कई विदेशी पासपोर्ट हैं, दुबई में अघोषित संपत्तियां हैं और अमेरिका में शेल कंपनियां संचालित की जा रही हैं। इन आरोपों के बाद असम पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया।

खेड़ा ने अपनी अग्रिम जमानत याचिका हैदराबाद में दाखिल की थी, जहां उनका निवास है। उनके वकील और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ दर्ज एफआईआर राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में गिरफ्तारी का खतरा वास्तविक है, इसलिए उन्हें अंतरिम संरक्षण दिया जाना जरूरी है।

वहीं, असम सरकार की ओर से पेश होते हुए एडवोकेट जनरल देवजीत सैकिया ने इस याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए। उन्होंने अदालत को बताया कि खेड़ा दिल्ली के निवासी हैं और उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे असम की अदालत में जाकर याचिका क्यों नहीं दाखिल कर सकते। उनके अनुसार, हैदराबाद में याचिका दाखिल करना न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।

असम पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की 14 धाराओं के तहत दर्ज इस केस में पुलिस का कहना है कि खेड़ा द्वारा लगाए गए आरोप न केवल आधारहीन हैं, बल्कि दुर्भावनापूर्ण भी हैं।

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब असम पुलिस की एक टीम दिल्ली स्थित पवन खेड़ा के आवास पर पहुंची। हालांकि, उस समय खेड़ा घर पर मौजूद नहीं थे। पुलिस ने उनके घर के बाहर बैरिकेडिंग की और हैदराबाद स्थित उनकी पत्नी के घर के बाहर भी सुरक्षा बढ़ा दी। इस कार्रवाई के बाद से यह मामला राजनीतिक रूप से भी काफी गरमा गया है।

विवाद की शुरुआत रविवार को हुई, जब पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री की पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद से वे लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। बुधवार को जारी एक वीडियो बयान में खेड़ा ने कहा कि वे इस तरह के दबाव से डरने वाले नहीं हैं और सवाल पूछते रहेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री से सीधे आरोपों पर जवाब देने की मांग भी की।

फिलहाल, तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली यह राहत पवन खेड़ा के लिए अस्थायी सुरक्षा प्रदान करती है, लेकिन उन्हें एक सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन करना होगा। आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई और राजनीतिक प्रभाव दोनों पर नजर बनी रहेगी।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें