असम भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने एग्जिट पोल पर कहा, "असम में भाजपा-NDA की जीत जरूर होगी। असम के मतदाताओं ने फिर एक बार भाजपा सरकार नारे को आगे बढ़ाने के लिए भाजपा का साथ दिया.बहुत ऐतिहासिक जनादेश हमें 4 मई को मिलने वाला है। भाजपा-NDA निश्चित रूप से तीसरी बार असम में सरकार बनाने जा रही है.पश्चिम बंगाल में भी भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनना तय है
असम विधानसभा चुनाव 2026 के एग्जिट पोल्स ने राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है। विभिन्न सर्वे एजेंसियों द्वारा जारी किए गए अनुमान बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाला गठबंधन इस बार भी प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करता दिख रहा है। 126 सीटों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 64 सीटों का आंकड़ा जरूरी होता है, और एग्जिट पोल्स के अनुसार भाजपा गठबंधन इस आंकड़े को आराम से पार करता नजर आ रहा है। इन अनुमानों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों को 75 से 95 सीटों के बीच मिलने की संभावना जताई गई है, जो स्पष्ट बहुमत से काफी आगे है।
एग्जिट पोल्स के अनुसार, राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन के पक्ष में माहौल कई कारणों से बना हुआ है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में सरकार की नीतियों, विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था में सुधार को मतदाताओं ने सकारात्मक रूप से लिया है। खासकर बुनियादी ढांचे के विकास, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और निवेश को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को समर्थन मिलता दिख रहा है। इसके अलावा, भाजपा ने क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर रणनीतिक तरीके से चुनाव लड़ा, जिसका फायदा उसे एग्जिट पोल्स में मिलता नजर आ रहा है।
वहीं विपक्षी दलों, खासकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय पार्टियों को इन एग्जिट पोल्स में अपेक्षित समर्थन नहीं मिलता दिख रहा है। हालांकि विपक्ष ने इन अनुमानों को खारिज करते हुए कहा है कि वास्तविक नतीजे इससे अलग होंगे और जनता बदलाव के पक्ष में मतदान कर चुकी है। उनका कहना है कि एग्जिट पोल्स अक्सर जमीनी हकीकत को पूरी तरह नहीं दर्शाते और अंतिम परिणाम आने तक इंतजार करना चाहिए।
भारत निर्वाचन आयोग ने भी स्पष्ट किया है कि आधिकारिक नतीजे केवल मतगणना के बाद ही घोषित किए जाएंगे। ऐसे में एग्जिट पोल्स को सिर्फ संभावित रुझान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। फिलहाल इन अनुमानों ने भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा दिया है, जबकि विपक्षी खेमे में रणनीति को लेकर मंथन तेज हो गया है। अब सबकी नजरें मतगणना के दिन पर टिकी हैं, जब यह साफ हो जाएगा कि राज्य की सत्ता पर किसका कब्जा होगा।