लाल किला विस्फोट मामले में फंसी फार्माकोलोजिस्ट डॉ. शाहीन सईद ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में नौकरी के दौरान कभी बुर्का नहीं पहना। शादी के बाद सामाजिक जिंदगी में भी उसने इस परंपरागत पहनावा को नहीं अपनाया। घर छोड़ने के बाद उसने कभी अपने बच्चों का हाल भी नहीं लिया। ख्वाहिशों ने उसको कट्टरपंथ की खाई में धकेल दिया। कट्टरपंथी आतंकी संगठनों के साथ जुड़ाव का मामला उजागर होने के बाद कॉलेज के चिकित्सा शिक्षक ताज्जुब कर रहे हैं। चिकित्सा शिक्षकों का कहना है कि नौकरी की शुरुआत डॉ. शाहीन ने कॉलेज से ही की लेकिन उसने कभी यहां बुर्का नहीं पहना। आम तरह के लिबास में ही रही, लेकिन वह अपनी बातों को किसी से साझा नहीं करती थी।