दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, "अब से ये तय किया गया है कि जो GRAP-4 के तहत पाबंदियां थीं, उसमें से हमने दो पाबंदियों को स्थायी कर दिया गया है। पहला PUCC को। कहीं पर भी आपको बिना PUCC सर्टिफिकेट के पेट्रोल नहीं मिलेगा.भारत स्टेज VI (BS6) से कम की जो दिल्ली से बाहर की गाड़ियां हैं, उनके भी दिल्ली प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा." उन्होंने आगे कहा, "मौसम के खराब होने की आशंका बताई जा रही है.दोबारा वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण मौसम खराब रह सकता है। इसलिए हम निगरानी कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि दिल्ली के लोगों को दोबारा इस तरह की चुनौतियों का सामना न करना पड़े
दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार ने अब सख्त रुख अपनाया है। हाल ही में दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुसार, ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के चौथे चरण के तहत लागू किए गए दो प्रमुख प्रतिबंधों को अब स्थायी (Permanent) कर दिया गया है।
अब दिल्ली के किसी भी पेट्रोल पंप पर बिना वैध Pollution Under Control Certificate (PUCC) के ईंधन (पेट्रोल, डीजल या सीएनजी) नहीं मिलेगा। पहले यह नियम केवल प्रदूषण के गंभीर स्तर (GRAP-4) के दौरान अस्थायी रूप से लागू किया जाता था, लेकिन अब इसे अगले आदेश तक स्थायी कर दिया गया है। इसका मतलब है कि वाहन चालकों को हर समय अपना प्रदूषण प्रमाण पत्र अपडेट रखना अनिवार्य होगा, अन्यथा वे अपनी गाड़ियों में तेल नहीं भरवा सकेंगे।
दिल्ली की सीमाओं पर प्रदूषण कम करने के लिए दूसरा बड़ा स्थायी फैसला BS-VI (BS6) मानकों को लेकर है। अब दिल्ली के बाहर से आने वाले वे सभी वाहन जो भारत स्टेज-6 (BS6) उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते हैं (जैसे BS3 या BS4 वाहन), उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। केवल BS6 मानक वाले वाहन, इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ और CNG वाहनों को ही दिल्ली में प्रवेश की अनुमति होगी। यह कदम मुख्य रूप से पड़ोसी राज्यों से आने वाले पुराने और अधिक धुआं छोड़ने वाले वाहनों को रोकने के लिए उठाया गया है।
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर लगातार 'बेहद खराब' (Very Poor) श्रेणी में बना हुआ है और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (Western Disturbance) के कारण हवा की गति कम होने से स्मॉग की चादर गहरी हो गई है। सरकार का मानना है कि केवल अस्थायी पाबंदियों से काम नहीं चलेगा, इसलिए इन दो नियमों को स्थायी बनाकर वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर दीर्घकालिक नियंत्रण पाने की कोशिश की जा रही है।