राजधानी दिल्ली में उम्र पूरी कर चुकी गाड़ियों को फ्यूल न देने देने के के बाद बाद गाड़ियों की उम्र को लेकर विवाद छिड़ गया है। राजधानी के व्यापारियों का दावा है कि पुराने वाहनों पर कार्रवाई के कारण इनके दामों में 50 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है।चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन और ऑटोमोबाइल व्यवसायी बृजेश गोयल ने शुक्रवार को कहा कि अभियान का सीधा असर करीब 60 लाख वाहनों पर पड़ा है। इससे कारों के व्यापार में भारी गिरावट आई है। इनके दाम तेजी से नीचे आए हैं। पांच दिनों में पुरानी कारों के दाम में 40 से 50 प्रतिशत कमी आई है। पेट्रोल पंपों पर आयु सीमा पार कर चुके वाहनों पर कार्रवाई से अफरातफरी की स्थिति बनी हुई है। दिल्ली से पंजाब, राजस्थान, यूपी, बिहार, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल सहित अन्य राज्यों में पुरानी कारें जाती हैं।करोल बाग, प्रीत विहार, पीतमपुरा, मोती नगर व अन्य इलाकों में एक हजार से ज्यादा व्यापारी पुरानी कारों की खरीद-फरोख्त करते हैं।
इन व्यापारियों का कहना है कि जो कार पहले 6-7 लाख रुपये में बिकती थी, उसके दाम 3 से 4 लाख रुपये तक ही मिल रहे हैं।लोगों के साथ अब एक्सपर्ट भी कह रहे हैं कि गाड़ियों को उम्र के आधार पर खत्म करना सही नहीं है। आइए जानते है कि आखिर विदेशों में गाड़ियां कब तक चलती है। जापान में कारों की औसत उम्र लगभग आठ से नौ साल है। लेकिन यहां अच्छी मेंटिनेस करके आप अपनी कार 13 से 15 साल या उससे भी ज्यादा समय तक चला सकते हैं। कुछ कारें यहां 20 साल या उससे भी ज्यादा समय तक चलती हैं। यहां गाड़ियों को खत्म करने से पहले उसकी स्थिति की पूरी जांच की जाती है। वहीं अमेरिका में कारों की औसत उम्र 12.6 साल है। हालांकि यहां इसमें बदलाव होते रहते हैं। निजी कारों की औसत उम्र यहां 14 साल है, जबकि हल्के ट्रकों की औसत आयु 11.9 साल है। पहले कारों के लिए उम्र 11 साल थी। इसका मतलब है कि अमेरिकी लोग अपनी कारों को पहले से कहीं ज्यादा लंबे समय तक रख रहे हैं।चीन में पुरानी गाड़ियों पर लगते हैं भर चीन में गाड़ियों की औसत उम्र 12.9 साल है। हालांकि गाड़ियों का कड़ा फिटनेस टेस्ट होता है। मॅटिनेस के हिसाब से यह उम्र कम या ज्यादा हो सकती है।
चीन में दस साल से ज्यादा पुरानी कार को पुरानी कार माना जाता है। इस पर कई तरह के अतिरिक्त टैक्स लगते हैं। कनाडा में कारों की औसत उम्र 10 से 11 साल है।हालांकि फिटनेस के आधार पर कई लोग अपनी कारों को इससे पहले बदल लेते हैं तो कुछ लोग इससे भी अधिक रखते हैं। ब्रिटेन में कारों की औसत उम्र 9.4 साल है। 2019 में यह 8 साल थी। एक तिहाई से ज्यादा कारें 12 साल से अधिक पुरानी है। यहां नई गाड़ी खरीदना काफी महंगा है इसलिए लोग अपनी गाड़ियों को अच्छा मेनटेन करते हैं।मुंबई में राष्ट्रीय वाहन स्क्रैप नीति है। 15 साल से ज्यादा पुरानी निजी गाड़ियों और 10 साल से ज्यादा पुरानी कमर्शल गाड़ियों को फिटनेस टेस्ट पास करना होता है। फेल होने पर स्क्रैप करना होता है। वहीं कोलकाता और हावड़ा में गाड़ियों की उम्र को लेकर नया नियम प्रस्तावित है। निजी गाड़ियों के लिए 20 साल की उम्र सीमा का प्रस्ताव NGT के सामने रखा गया है। अभी यह लागू नहीं है। बेंग्लुरु में 15 साल से पुरानी गाड़ियों को फिटनेस टेस्ट पास करना जरूरी है। कर्नाटक सरकार ने ग्रीन टैक्स भी लगाया है। यहां कोई सख्त उम्र सीमा नहीं है।गाड़ी का कराना होता है री-रजिस्ट्रेशन