तमिलनाडु के तिरुपुर जिले से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी खास पहचान बनाने वाले सीपी राधाकृष्णन का जीवन संघर्ष और समर्पण की मिसाल है। 4 मई 1957 को जन्मे राधाकृष्णन ने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) की पढ़ाई की और कॉलेज के दिनों में ही खेलों—टेबल टेनिस, क्रिकेट और वॉलीबॉल—में अपनी छाप छोड़ी। इस वीडियो में Amar Ujala Digital के संपादक Jaideep Karnik से समझिए कि CP Radhakrishnan कौन हैं, उनका राजनीतिक सफर, OBC समुदाय से जुड़ाव और भाजपा में उनकी भूमिका क्या है ?
सबसे पहले सीपी राधाकृष्णन को जान लीजिए
सीपी राधाकृष्णन का जन्म 4 मई 1957 को तमिलनाडु के तिरुपुर जिले में हुआ। सीके पोन्नूसामी और के. जानकी के घर जम्मे राधाकृष्णन ने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक यानी बीबीए की पढ़ाई की है। आरएसएस के स्वयं सेवक राधाकृष्णन 1974 में भारतीय जनसंघ की राज्य कार्यकारिणी समिति के सदस्य बने। 25 नवंबर 1985 को उनकी शादी आर. सुमति से हुई। दोनों का एक बेटा और एक बेटी है। 68 साल के राधाकृष्णन ओबीसी समुदाय कोंगु वेल्लार से आते हैं। खेलों के शौकीन राधाकृष्णन कॉलेज स्तर पर टेबल टेनिस के चैंपियन और लंबी दूरी के धावक थे। उन्हें क्रिकेट और वॉलीबॉल का भी शौक रहा है।
अब बात राधाकृष्णन की सियासी पारी की भी कर लेते हैं...
साल 1996 में उन्हें तमिलनाडु भाजपा का सचिव बनाया गया। 1998 के लोकसभा चुनाव में कोयंबटूर सीट से जीतकर पहली बार लोकसभा पहुंचे। इस दौरान संसद में टेक्सटाइल पर स्थायी समिति के सदस्य रहे। 1999 के चुनाव में फिर से कोयंबटूर सीट पर जीत का परचम लहराया। ये पीएसयू समिति, वित्त पर परामर्श समिति और शेयर बाजार घोटाले की जांच करने वाली विशेष समिति के सदस्य भी रहे। साल 2004 में राधाकृष्णन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को भारतीय संसदीय दल के हिस्से के रूप में संबोधित भी किया। राधाकृष्णन ताइवान जाने वाले पहले संसदीय प्रतिनिधिमंडल का भी हिस्सा थे।