नई दिल्ली में 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस द्वारा छात्रों के मुद्दों, कथित पुलिस कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने किया। उनके साथ कांग्रेस के कई सांसद, वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। प्रदर्शन लगभग पांच घंटे तक चला, जिसके दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों को न्याय दिलाने, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग करते रहे। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि वे छात्रों की आवाज को दबाने के किसी भी प्रयास का विरोध करेंगे और जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
शाम करीब सात बजे दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन स्थल को खाली कराने की कार्रवाई शुरू की। इसके बाद पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कांग्रेस के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। प्रदर्शन में समर्थन देने पहुंचे समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस ने इससे पहले प्रधानमंत्री आवास की ओर जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी और कई रास्तों को बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया था, ताकि अतिरिक्त प्रदर्शनकारी धरना स्थल तक न पहुंच सकें। इसके बावजूद विपक्षी दलों के नेता और कार्यकर्ता लगातार प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़ने का प्रयास करते रहे।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह छात्रों के हितों से जुड़ा है और वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे, जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलता। राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस सांसद और कार्यकर्ता प्रधानमंत्री आवास के बाहर दिन-रात धरने पर बैठने के लिए तैयार हैं। उनके अनुसार यह केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य की लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।
इस बीच समाजवादी पार्टी ने भी कांग्रेस के आंदोलन को समर्थन दिया। सपा अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव धरना स्थल पर पहुंचे और छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को छात्रों की जायज़ मांगें स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "जो मांग छात्रों की है, सरकार को छात्रों की मांग माननी चाहिए, सरकार को उनकी मांगों को स्वीकार करना चाहिए। सरकार ने जो छात्रों के साथ अन्याय किया है, हम सदन में यही मुद्दा उठाएंगे।" अखिलेश यादव ने संकेत दिया कि संसद के भीतर भी विपक्ष छात्रों से जुड़े मुद्दों और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता रहेगा। विपक्षी दलों ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक अधिकारों और छात्रों की आवाज से जुड़ा मुद्दा बताते हुए आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।