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CJI Gavai Attacked in Supreme Court: CJI की बहन कीर्ति गवई ने हमले पर की संविधान बचाने की अपील।

Wed, 08 Oct 2025 02:46 PM IST
अभिलाषा पाठक वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम

सीजेआई बीआर गवई पर एक वकील द्वारा वस्तु फेंकने की कोशिश पर, सीजेआई बीआर गवई की बहन कीर्ति गवई ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के अंदर सीजेआई पर हमला व्यक्तिगत स्तर पर नहीं है। यह संविधान पर हमला है। संविधान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसकी रक्षा करना हमारी ज़िम्मेदारी है..." सुनिए CJI की बहन ने क्या मांग की।

इससे पहले मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर हमले के प्रयास पर बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम भावुक हो उठे, जिन्होंने इसे 'सभी दलितों का दर्द' बताया। राम ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट पर हमला और लाखों दलितों का अपमान है, जो समाज में दलितों के प्रति जारी भेदभाव को दर्शाता है।बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम मंगलवार को उस समय रो पड़े जब उन्होंने एक वकील द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश के बारे में बात की। राम, जो खुद भी दलित हैं, ने कहा कि यह दर्द सभी दलितों को होता है। न्यायमूर्ति गवई ऐतिहासिक रूप से उत्पीड़ित जाति समूह, दलितों से मुख्य न्यायाधीश बनने वाले दूसरे व्यक्ति हैं, तथा पहले बौद्ध हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट पर हमला है। (और) लाखों दलितों का अपमान है। इस पर उनकी आंखों में आंसू आ गए।राजेश राम ने पटना में एक प्रेस वार्ता में कहा कि हम जानते हैं कि समाज में इतनी ऊँचाई तक पहुँचने से पहले, एक व्यक्ति को कितने लंबे समय तक कितनी त्रासदियाँ और कितना दर्द सहना पड़ता है। उसके बाद भी, जब समाज उसे स्वीकार नहीं करता, तो आप अपने घर की चारदीवारी में भी अपमानित महसूस करते हैं।

उन्होंने कहा कि एक दलित होने के नाते, इससे ज़्यादा गहरी भावना और क्या हो सकती है। उन्होंने आगे कहा कि हमें हमेशा से, यहाँ तक कि विधानमंडलों के भीतर भी, आज तक भेदभाव सहना पड़ा है। वह यह कहते हुए बीच वाक्य में ही रो पड़े: "हमने सड़कों पर हर दिन इसका सामना किया है, लेकिन अब, बहुत भारी मन से...।" वह कुछ देर रुके, उनके होंठ काँप रहे थे, फिर उन्होंने कहा, "यह दर्द उन सभी दलितों को है जो गवई साहब पर हुए हमले का असर महसूस कर रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा कि दलितों के अपमान का इससे बड़ा कोई उदाहरण नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि "बाबा साहेब (बी.आर. अंबेडकर) द्वारा बनाए गए संविधान की बदौलत ही" वह प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने विचार साझा करने की स्थिति में हैं। इससे पहले, दिल्ली के 71 वर्षीय वकील राकेश किशोर, जिन्होंने मुख्य न्यायाधीश पर हमला करने की कोशिश की थी, ने कहा कि उन्हें कोई पछतावा नहीं है।


 

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