महाराष्ट्र में राजनीतिक दलों की ओर से तमाम दावों और वादों के बाद अब बीएमसी का चुनाव प्रचार थम गया है। अब मुंबई की जनता के पास अपने मत का प्रयोग करते हुए फैसला देने का वक्त आ गया है। क्योंकि बीएमसी चुनाव का प्रचार थम गया है। इसी के साथ 15 जनवरी को मतदान होगा और 16 जनवरी को इसके नतीजे घोषित किए जाएंगे वहीं महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आशीष शेलार ने MNS प्रमुख राज ठाकरे के बयान पर कहा, "हम अडानी या किसी भी कॉरपोरेट हाउस की वकालत नहीं करते लेकिन हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि किसी व्यवसायिक कॉरपोरेट हाउस के नाम पर भाजपा पर अगर आप टिप्पणी करेंगे तो हम उसका जवाब देंगे। राज ठाकरे को पूरी जानकारी नहीं है... महाराष्ट्र की सरकार निवेश का स्वागत करती है, किसी एक समूह के साथ नहीं होती। राज ठाकरे, उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र में आने वाले निवेश के खिलाफ हैं, महाराष्ट्र के विकास के खिलाफ हैं, महाराष्ट्र के हितों के खिलाफ बयान राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे दे रहे हैं
BMC (बृहन्मुंबई नगर निगम) चुनाव 2026 के लिए प्रचार का शोर अब थम चुका है। 15 जनवरी 2026 को होने वाले मतदान से पहले, आखिरी दिन (13 जनवरी) महायुति (Mahayuti) और महा विकास अघाड़ी (MVA) के दिग्गजों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी।मुंबई की 227 सीटों पर कब्जा जमाने के लिए इस बार समीकरण काफी दिलचस्प हैं:
इसमें BJP (135+ सीटें) और एकनाथ शिंदे की शिवसेना (90 सीटें) मुख्य रूप से साथ हैं। अजित पवार की NCP भी मैदान में है, लेकिन कई सीटों पर वह स्वतंत्र रूप से लड़ रही है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की MNS ने करीब 20 साल बाद हाथ मिलाया है, जिसे "मराठी अस्मिता" के नाम पर बड़ा कार्ड माना जा रहा है। कांग्रेस ने इस बार प्रकाश अंबेडकर की VBA के साथ गठबंधन किया है और वह करीब 151 सीटों पर लड़ रही है।
आखिरी दिन की बड़ी बातें (Highlights of the Final Day)
शिवाजी पार्क में शक्ति प्रदर्शन: प्रचार के अंतिम घंटों में दादर के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क और मध्य मुंबई में भारी रैलियां देखी गईं।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रोड शो और सभाओं के जरिए "डबल इंजन सरकार" और "पारदर्शी शासन" का वादा किया। फडणवीस ने उद्धव और राज ठाकरे के पुराने वीडियो दिखाकर उन पर "अस्तित्व की लड़ाई" लड़ने का तंज कसा। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने संयुक्त रूप से मराठी मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की। उनका मुख्य मुद्दा मुंबई के प्रोजेक्ट्स का गुजरात जाना और मराठी मानुस की उपेक्षा रहा।