मुंबई में बीएमसी चुनाव को लेकर सियासी पारा हाई हो गया है सभी नेता चुनाव प्रचार में जुट गए हैं. वहीं BMC चुनाव 2026 पर केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा, "मैं यहां प्रचार के लिए आया था.महा नगरपालिका में ठाकरे बंधु की छुट्टी करनी है और कांग्रेस पार्टी को सबक सिखाना है। महायुति के उम्मीदवार को जिताने की अपील करने के लिए मैं आया था। नरेंद्र मोदी विकास के लिए बहुत काम कर रहे हैं। इसलिए हमें महायुति के साथ रहना चाहिए ये अपील करने मैं यहां आया था.हमारा लक्ष्य है कि 150 सीटें आनी चाहिए लेकिन हम 180 तक भी जा सकते हैं।
महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने बीएमसी चुनाव की घोषणा कर दी है, जिसके अनुसार मतदान 15 जनवरी 2026 को होगा। वोटों की गिनती और परिणामों की घोषणा अगले ही दिन, 16 जनवरी 2026 को की जाएगी। नामांकन की प्रक्रिया दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में पूरी हो चुकी है और अब सभी दल प्रचार के अंतिम चरण में हैं। इस चुनाव के लिए 1 जुलाई 2025 की मतदाता सूची का उपयोग किया जा रहा है।
मुंबई में कुल 227 वार्डों पर चुनाव हो रहे हैं। इस बार वार्डों की सीमाओं में आंशिक बदलाव (करीब 20-25%) किया गया है। सीटों के समीकरण में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण लागू है, जिसके तहत 227 में से 114 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। बहुमत के लिए किसी भी पार्टी या गठबंधन को 114 सीटों के जादुई आंकड़े को पार करना होगा।
इसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP), एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) शामिल हैं। महायुति ने विकास और केंद्र-राज्य के तालमेल के मुद्दे पर चुनाव लड़ा है। इसमें उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT), शरद पवार की NCP (SP) और कांग्रेस शामिल हैं। हालांकि, कुछ सीटों पर स्थानीय स्तर पर गठबंधन के स्वरूप में बदलाव भी देखा गया है। इस चुनाव की सबसे बड़ी चर्चा उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे (MNS) के बीच संभावित चुनावी तालमेल और साझा घोषणापत्र ('वचन नामा') को लेकर रही है, जिसने मुकाबले को और अधिक कड़ा बना दिया है।
बीएमसी का बजट भारत के कई छोटे राज्यों से भी बड़ा है, इसलिए इसे "एशिया की सबसे अमीर नगर पालिका" कहा जाता है। इस बार के चुनाव में सड़कों की स्थिति (गड्ढे), जल निकासी और बाढ़ प्रबंधन, तटीय सड़क (Coastal Road) जैसे बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स, और मुंबई की 'मराठी अस्मिता' बनाम 'विकास' जैसे मुद्दे हावी हैं। साथ ही, धारावी पुनर्विकास परियोजना और स्थानीय प्रशासन में पारदर्शिता भी बड़े चुनावी मुद्दे बने हुए हैं।