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Bihar Election 2025: Tejashwi Yadav का Election Commission पर हमला | PM Modi | Nitish Kumar

Sat, 28 Jun 2025 01:57 PM IST
आकाश शर्मा वीडियो डेस्क अमर उजाला

 RJD नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग की नई मतदाता सूची प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 8 करोड़ वोटरों के लिए 25 दिन में लिस्ट बनाना असंभव है और यह भाजपा-नीतीश की साजिश है। साथ ही उन्होंने इसे गरीब विरोधी और अव्यावहारिक बताया है।

बिहार में विपक्षी दलों के महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा बताए जा रहे तेजस्वी यादव ने भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को महागठबंधन के विभिन्न दलों के नेताओं के साथ राष्ट्रीय जनता दल कार्यालय में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि निर्वाचन आयोग साजिश के तहत बिहार चुनाव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हिसाब से मतदाताओं की छंटनी कराना चाहता है। इसी कारण आयोग ने बिहार चुनाव में युवा वोटरों से उनके पिता-माता की नागरिकता का प्रमाण मांग रहा है। तेजस्वी ने बताया कि राज्य सरकार और केंद्र के आंकड़ों के आधार पर बताया कि बिहार में मैट्रिक करने वाले कितने कम हैं और जन्म प्रमाणपत्र वाले कितने कम लोग हैं। उन्होंने बाढ़ में भी ऐसे नागरिकता प्रमाणपत्र बह जाने की बात कहते हुए आरोप लगाया कि आयोग संघ और भाजपा के हिसाब से काम करते हुए दलित, पिछड़ों और अति-पिछड़ों का मताधिकार छीनने के लिए नागरिकता का प्रमाणपत्र मांग रहा है।

जस्वी यादव ने कहा कि मानसून का वक्त चल रहा है। बिहार का 73 फीसदी इलाका बाढ़ से प्रभावित रहता है। अब सवाल उठता है कि लोग अपनी जान बचाएंगे या चुनाव आयोग को अपने कागजात खोज कर देंगे? नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि 90 फीसदी बीएलओ के पास मतदाता सूची भी उपलब्ध नहीं करवाई गई है और इनलोगों से काम शुरू करवा दिया गया है। उन्होंने कहा कि एनडीए वाले पहले गरीबों का मतदाता सूची से नाम काटेंगे। पहचान पत्र नहीं बनाया जाएगा। फिर गरीबों का राशन और पेंशन बंद करेंगे। वंचित तबकों की छात्रवृति भी बंद करने की इनकी योजना है। यह लोग आधार और मनरेगा कार्ड को वैद्य नहीं मान रहे हैं। मैं दावे के साथ कहता हूं कि सौ फीसदी लोगों का आधार कार्ड भी नहीं बना होगा। चुनाव आयोग ने ही कहा था कि वोटर और आधार कार्ड लिंक करें। लेकिन, अब आधार कार्ड को नहीं मान रहे हैं।

जब लोकसभा चुनाव उसी मतदाता सूची पर हुआ है तो बिहार विधानसभा चुनाव क्यों नहीं हो सकता? यह अचानक से क्यों खत्म किया जा रहा है। क्या उसी सूची के आधार पर बनी सरकार की वैद्यता पर सवाल नहीं उठता है। तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में आठ करोड़ योग्य मतदाता हैं। इसमें से चार करोड़ छिहत्तर लाख लोगों को अपनी नागरिकता साबित करनी चाहिए। इन्हें तीन समूहों में बांटा जा सकता है। पहले समूह में चार प्रतिशत लोग ऐसे हैं 39 से 40 वर्ष की आयु के हैं। इन्हें अपनी नागरिकता के दस्तावेज देने हैं। दूसरे समूह में 20 से 38 वर्ष के लोग हैं। यह 85 प्रतिशत हैं। इन्हें अपने माता-पिता की नागरिकता को साबित करनी होगी। लगभग 11 प्रतिशत लोग जो 18 से 20 उम्र के हैं, उन्हें अपने अपने माता-पिता और अपनी नागरिकता के दस्तावेज करने होंगे।   

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