कांग्रेस ने बिहार में मिली करारी हार की समीक्षा की इस बीच उम्मीदवारों से फीडबैक लिया गया जिसमें 10,000 रुपये ट्रांसफर, देर से सीट बंटवारा, आंतरिक कलह और चुनावी गड़बड़ियों को बड़ी वजह बताया गया पार्टी अध्यक्ष खरगे, राहुल गांधी और के.सी. वेणुगोपाल ने गुरुवार को उम्मीदवारों से मुलाकात की, जिसमें नेताओं ने खुलकर शिकायतें रखीं। कई उम्मीदवारों ने कहा कि एनडीए सरकार द्वारा महिलाओं को 10,000 रुपये का ट्रांसफर, समय पर सीट बंटवारा तय न होना, आंतरिक कलह और चुनावी गड़बड़ियों ने चुनाव परिणाम को प्रभावित किया। सूत्रों के अनुसार, विवाद कथित तौर पर उस समय हुआ जब कांग्रेस अध्यक्ष खरगे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी बैठक में मौजूद नहीं थे। पार्टी ने अभी तक इस घटना पर कोई बयान नहीं दिया है। हालांकि, पप्पू यादव ने इन रिपोर्टों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि बैठक में कोई झगड़ा नहीं हुआ। चुनावी हार के कारणों पर पार्टी नेतृत्व ने उम्मीदवारों से विस्तृत फीडबैक लिया। खबरों की मानें तो इंजीनियर संजीव और जितेंद्र कुमार के बीच बाहरी लोगों को टिकट देने के मुद्दे पर तीखी नोकझोंक हुई और संजीव ने जितेंद्र को धमकाया, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। समीक्षा बैठक में उम्मीदवारों ने कांग्रेस अध्यक्ष खरगे, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल से कहा कि हार की बड़ी वजह एनडीए सरकार द्वारा महिलाओं को चुनाव से ठीक पहले 10,000 रुपये ट्रांसफर करना, गठबंधन में देरी और कई चरणों में ‘चुनावी गड़बड़ी’ रही। नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया संदिग्ध रही और कई सीटों पर एक जैसे अंतर से नतीजे आए, जिससे प्रक्रिया पर सवाल बढ़े। बैठक में उम्मीदवारों ने ‘मतदाता सूची में हेरफेर’, मतदान केंद्रों पर नकद बांटने और मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का दुरुपयोग किए जाने के आरोप दोहराए। वेणुगोपाल ने कहा कि बिहार का परिणाम “संगठित चुनावी कदाचार” का उदाहरण है और यह लोकतंत्र पर सीधा हमला है। उनका कहना था कि चुनाव आयोग ने भाजपा के पक्ष में असामान्य रूप से सहयोगी भूमिका निभाई। वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर बताया कि बैठक में उम्मीदवारों और नेताओं ने कई गंभीर मुद्दे उठाए। उनके अनुसार, ये मुद्दे दर्शाते हैं कि चुनाव में संगठित तरीके से चुनावी धांधली की गई है: