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Bankipur by-election: बांकीपुर उपचुनाव पर प्रशांत किशोर के इस दांव ने बढ़ाई भाजपा की टेंशन!

वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Updated Thu, 09 Jul 2026 02:12 AM IST


प्रशांत किशोर ने बांकीपुर उपचुनाव को केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मुकाबला बताया। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि यदि बांकीपुर की जनता सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली व्यवस्था को बदलना चाहती है और भाजपा के कथित राजनीतिक घमंड को चुनौती देना चाहती है, तो उन्हें इस चुनाव में बदलाव के पक्ष में मतदान करना चाहिए। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि यह चुनाव पारंपरिक राजनीतिक दलों, जातिगत समीकरणों या धार्मिक ध्रुवीकरण का चुनाव नहीं है, बल्कि जनता और वर्तमान सत्ता के बीच सीधा फैसला है। 

उन्होंने कहा कि बांकीपुर की जनता को यह तय करना होगा कि वह पुराने राजनीतिक ढर्रे को जारी रखना चाहती है या फिर एक नई राजनीतिक सोच और जवाबदेह नेतृत्व को अवसर देना चाहती है। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि यह मुकाबला प्रतीकात्मक रूप से सम्राट चौधरी और प्रशांत किशोर के बीच है, क्योंकि एक ओर वर्तमान सत्ता और उसकी नीतियां हैं, जबकि दूसरी ओर जन सुराज का वैकल्पिक राजनीतिक मॉडल है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे जाति, धर्म और पार्टी की पारंपरिक सीमाओं से ऊपर उठकर अपने क्षेत्र के विकास, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और बेहतर प्रशासन जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दें। प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि बिहार लंबे समय से जातीय राजनीति और चुनावी वादों के बीच उलझा हुआ है, जिसके कारण अपेक्षित विकास नहीं हो पाया। उनका कहना था कि यदि जनता वास्तव में बदलाव चाहती है तो उसे इस चुनाव में अपने मत का प्रयोग सोच-समझकर करना होगा। उन्होंने दावा किया कि जन सुराज की राजनीति का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और विकास को प्राथमिकता देना है। 

हालांकि, राजनीतिक दृष्टि से यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि प्रशांत किशोर का यह बयान चुनावी प्रचार का हिस्सा है और इसमें व्यक्त विचार उनके राजनीतिक दावे और मतदाताओं से की गई अपील को दर्शाते हैं। दूसरी ओर, भाजपा और उसके नेता इस तरह के आरोपों को खारिज करते हुए अपने शासनकाल की उपलब्धियों, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता के सामने रख रहे हैं। ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम यह संकेत देगा कि मतदाता वर्तमान सरकार की नीतियों पर भरोसा बनाए रखते हैं या फिर जन सुराज द्वारा प्रस्तुत वैकल्पिक राजनीतिक विकल्प को समर्थन देना चाहते हैं। इस कारण यह उपचुनाव बिहार की राजनीति में विशेष महत्व का माना जा रहा है।

 

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