पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा BSF को ज़मीन न दिए जाने पर, भाजपा नेता निशीथ प्रमाणिक ने कहा, "मैं सीमा इलाके के पास गया था। वे बंजर, बेकार ज़मीनें हैं जिन्हें खाली छोड़ दिया गया है। ज़मीन के मालिक बॉर्डर फेंसिंग के लिए ज़मीन देने को तैयार हैं, लेकिन राज्य सरकार इसे मंज़ूरी नहीं दे रही है। ज़मीन राज्य का मामला है, और केंद्र सरकार इसमें कुछ नहीं कर सकती। मुझे नहीं पता कि राज्य सरकार ज़मीन क्यों नहीं दे रही है या इसके पीछे उनका मकसद क्या है
कलकत्ता हाईकोर्ट ने भारत-बांग्लादेश सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि पश्चिम बंगाल सरकार को नौ सीमावर्ती जिलों में पहले से अधिग्रहित जमीन को 31 मार्च 2026 तक बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) को सौंपना होगा, ताकि सीमा पर बाड़बंदी का अधूरा काम पूरा किया जा सके और घुसपैठ तथा तस्करी जैसी गतिविधियों को रोका जा सके। यह निर्देश एक जनहित याचिका (PIL) के बाद आया, जिसमें बताया गया था कि सीमा के बड़े हिस्सों पर अब भी बाड़ नहीं लग पाई है, जिससे सुरक्षा जोखिम बढ़ रहा है। अदालत ने इस आदेश को राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम कदम बताया है।
इस फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर तीखा हमला बोला है। भाजपा का आरोप है कि ममता सरकार सीमा सुरक्षा और बाड़बंदी को बाधित कर रही है और राजनीतिक लाभ के लिए घुसपैठियों को संरक्षण दे रही है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा होता है। भाजपा नेताओं का कहना है कि High Court का यह आदेश स्पष्ट करता है कि राज्य सरकार ने सीमा के अदृश्य हिस्सों पर बाड़ लगाने में देरी की है एवं आवश्यक कार्रवाई नहीं की है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसके साथ ही ममता सरकार को “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा” बताते हुए आरोप लगाया कि बंगाल में घुसपैठ और अवैध गतिविधियों को राजनीतिक वोटबैंक के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। शाह ने कहा कि टीएमसी की तुष्टिकरण की राजनीति ने सुरक्षा एजेंसियों को ठीक से काम करने नहीं दिया और राज्य में अवैध घुसपैठियों की समस्या को और बढ़ा दिया है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की ओर से सत्ता में आने पर उच्च न्यायालय के निर्देशों को तेज़ी से लागू किया जाएगा और सीमा को सुरक्षित किया जाएगा।
भाजपा ने चुनावी दृष्टिकोण से भी तंज कसा है और कहा है कि 2026 के विधानसभा चुनावों में यह मुद्दा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पार्टी का कहना है कि अगर बंगाल में उनकी सरकार बनती है तो 45 दिनों में BSF को सभी ज़मीन सौंप दी जाएगी और अवैध घुसपैठ के रास्तों को पूरी तरह बंद किया जाएगा।
दूसरी ओर, टीएमसी और ममता बनर्जी ने इन आरोपों का पलटवार किया है और कहा है कि सीमा सुरक्षा, सामुदायिक शांति और सामाजिक सौहार्द के मुद्दों को राजनीति का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए, तथा सुरक्षा एजेंसियों और राज्य सरकार के बीच सहयोग जरूरी है। हालांकि ताज़ा बयान जारी नहीं हुए हैं, लेकिन यह मामला राजनीतिक रूप से गरमाता हुआ दिख रहा है। इस प्रकार कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश न सिर्फ सीमा सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण है, बल्कि राजनीति में भी एक नया मुद्दा बन चुका है, जहाँ भाजपा और ममता बनर्जी के बीच तीखी तकरार जारी है।