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आजम खां ने की मायावती की तारीफ, अखिलेश को छोड़ बसपा का थामेंगे दामन?

Sat, 11 Oct 2025 01:52 PM IST
आदर्श अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम

उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय बाद एक ऐसा बयान आया है जिसने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खां ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती की खुलकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि मायावती एक बड़े जनसमूह की नेता हैं और उनका पूरा देश सम्मान करता है।

उनके इस बयान से न सिर्फ विपक्षी खेमे में हलचल मच गई है, बल्कि यह अटकलें भी तेज हो गई हैं कि आज़म खां कहीं बसपा की ओर रुख करने की तैयारी तो नहीं कर रहे?

एक टीवी इंटरव्यू में आजम खां ने मायावती के साथ अपने पुराने रिश्तों को याद करते हुए कहा “जब वो रैली में रामपुर आई थीं, तो मेरी मेहमान थीं। मेरा उनके बड़ों से भी रिश्ता रहा है।”

उन्होंने एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए बताया “लखनऊ में जब मैं सुबह फज्र की नमाज पढ़ता था, तब कांशीराम जी उनसे मिलने आते थे और आधा-एक घंटे तक बात करके जाते थे। ये बात बहुत कम लोगों को मालूम है।”

इस बयान से साफ झलकता है कि आजम खां न सिर्फ मायावती के प्रति सम्मान रखते हैं, बल्कि उन दिनों के राजनीतिक और व्यक्तिगत संबंधों की यादें आज भी उनके मन में ताज़ा हैं।

मायावती के प्रति अपने सम्मान को दोहराते हुए आजम खां ने कहा, “मैं कोई ऐसी बात नहीं कह सकता जो उनके लिए दुख का कारण बने या शिकायत का सबब हो।”

यह बयान ऐसे समय आया है जब सपा और बसपा दोनों दल अलग-अलग दिशा में राजनीति कर रहे हैं, और दोनों के बीच लंबे समय से दूरी बनी हुई है।
सपा के एक वरिष्ठ नेता का मायावती के लिए इस तरह का सम्मानजनक बयान न केवल राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के संकेत देता है, बल्कि यह भी बताता है कि आजम खां अब एक नए सियासी स्वर के साथ लौटना चाहते हैं।

हाल ही में लखनऊ में बसपा की रैली के दौरान मायावती ने सपा सरकार पर कई आरोप लगाए थे। जब इस पर आजम खां से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने शांत लहजे में जवाब दिया-

“ये राजनीतिक सवाल है और उनकी राजनीतिक शिकायत है। इसका जवाब जो हमारे यहां उनके स्तर के हैं, वही देंगे।” उन्होंने इस बयान से न केवल विवाद से दूरी बनाई, बल्कि यह भी दिखाया कि वे अब टकराव की राजनीति से बचते हुए सम्मानजनक संवाद की राह पर चलना चाहते हैं।

बीते वर्षों की कठिनाइयों पर बात करते हुए आजम खां ने कहा, “मैं तो आठ-दस बरस से ऐसे हालात का शिकार हूं कि मुझे यही नहीं मालूम कौन सा पार्क कहां था, कहां है। दस साल बड़े ही सख्त गुजरे हैं।”

यह बयान आजम खां की राजनीतिक और व्यक्तिगत संघर्ष की झलक देता है। जेल, मुकदमों और स्वास्थ्य संकटों के बीच उन्होंने लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाई रखी। अब जब वह धीरे-धीरे सार्वजनिक मंचों पर लौट रहे हैं, तो उनके बयान स्वाभाविक रूप से सियासी चर्चा का केंद्र बन रहे हैं।

भविष्य की संभावनाओं पर बात करते हुए आजम खां ने कहा, “अगर हम सत्ता में आते हैं, जिसकी उम्मीद की जा सकती है, तो कोशिश करेंगे कि मायावती जी की शिकायतों का समाधान हो और आगे उन्हें ऐसी किसी शिकायत का मौका न मिले।”

उनके इस बयान ने कई सियासी अर्थ पैदा कर दिए हैं। कुछ जानकारों का कहना है कि यह बयान सपा-बसपा के बीच भविष्य में संभावित ‘पुल’ का संकेत हो सकता है, जबकि कुछ इसे व्यक्तिगत शालीनता का प्रतीक मान रहे हैं।

आजम खां के इस बयान ने साफ कर दिया है कि वे अब राजनीति में टकराव से अधिक तालमेल और संवाद की राह पर चलना चाहते हैं। उनकी मायावती के प्रति प्रशंसा यह बताती है कि राजनीति में पुराने रिश्ते कभी पूरी तरह खत्म नहीं होते। अब देखना यह होगा कि इस बयान के बाद सपा और बसपा के बीच दूरियां घटती हैं या सियासी प्रतिस्पर्धा और तेज होती है। फिलहाल इतना तय है आजम खां के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।

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