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Attack on Abhishek Banerjee : अभिषेक बनर्जी पर हमला करने वाले 6 लोग गिरफ्तार,TMC से निकला कनेक्शन

वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Updated Mon, 01 Jun 2026 01:41 AM IST

पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद Abhishek Banerjee के साथ कथित दुर्व्यवहार और विरोध प्रदर्शन की घटना सामने आई। यह घटना शनिवार, 30 मई को उस समय हुई जब अभिषेक बनर्जी चुनाव बाद हिंसा में मारे गए एक तृणमूल कार्यकर्ता के परिवार से मिलने पहुंचे थे। दौरे के दौरान कुछ लोगों ने उनके काफिले के सामने विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गई, जिसके बाद सुरक्षा कर्मियों और पुलिस ने हस्तक्षेप कर हालात को नियंत्रित किया।

घटना के बाद तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह विरोध सुनियोजित था और इसके पीछे राजनीतिक साजिश थी। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि अभिषेक बनर्जी को निशाना बनाने की कोशिश की गई और उनके दौरे को बाधित करने का प्रयास हुआ। दूसरी ओर विपक्षी दलों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि स्थानीय लोगों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को और अधिक गर्म कर दिया तथा सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और Bharatiya Janata Party के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की और अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार किए गए लोगों में कुछ ऐसे व्यक्ति भी शामिल हैं जो पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़े हुए थे, लेकिन हाल के चुनावी नतीजों के बाद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि विरोध प्रदर्शन स्वतःस्फूर्त था या इसके पीछे कोई संगठित योजना थी। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और घटना के दौरान मौजूद लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।

इस बीच, तृणमूल कांग्रेस ने घटना को लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर हमला बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पार्टी का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है और दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और किसी भी राजनीतिक दल को बिना सबूत दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। सोनारपुर की यह घटना चुनाव बाद पश्चिम बंगाल में जारी राजनीतिक तनाव और दलों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को एक बार फिर उजागर करती है। अब सभी की नजर पुलिस जांच पर है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और गिरफ्तार किए गए लोगों की भूमिका कितनी गंभीर थी।

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