आधुनिकता के दौर में मेडिटेशन और प्राणायाम बहुत जरूरी है। जिससे एकाग्रता और मन शांत होता है। नई सोच विचारों में आती है। यह बात अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉक्टर किरण शर्मा ने कही। कार्यक्रम का आयोजन शिक्षा भारती बीएड कॉलेज समुर खुर्द में किया गया। उन्होंने प्रशिक्षु छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़े और हर क्षेत्र में सीखने की कला होनी चाहिए। तभी आगे बड़ा जा सकता है और सकारात्मक सोच से ही चैतन्य शक्ति बनती है। उन्होंने कहा कि शब्दों में बहुत एनर्जी होती है और इससे ही ब्रह्मांड में सकारात्मक ऊर्जा का संचरण होता है। इंसान को सेल्फ रिस्पेक्ट करना सीखनी चाहिए। अगर इसकी पहल अपनी ओर से होगी तो सामने वाले से भी वैसे ही सकारात्मक व्यवहार भी देखने को मिलेगा। महिलाओं को खुद की सुरक्षा और सम्मान करना चाहिए ।लेकिन वर्तमान के बदलते परिवेश में समाज का हर वर्ग के रास्ते में सोशल मीडिया बाधा बना हुआ है। आपसी प्रेम और रिश्ते खत्म हो रहे हैं। सहनशीलता खत्म हो रही है और शिक्षा ही एक ऐसा हथियार है। जिससे हर बाधा को दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया के जाल में फंसकर अपने मार्ग से विचलित हो गई है। ना बच्चा अपने अभिवावकों की सुन रहा है और ना ही संस्थानों में शिक्षकों की बातों की ओर ध्यान दिया जा रहा है ।अगर ऐसा ही सिलसिला रहा तो आने वाले समय में विकट स्थिति खड़ी हो सकती है। उन्होंने कहा है कि युवा पीढ़ी को अपना पूरा ध्यान अपने लक्ष्य को पूरा करने की ओर केंद्रित करना चाहिए। लेकिन वर्तमान का युवा सोशल मीडिया फेसबुक इंस्टाग्राम और अन्य सिस्टम में उलझ कर रह गया है और अपने जीवन और लक्ष्य प्राप्ति की ओर कोई भी ध्यान नहीं दे रहा है । कहा कि आध्यात्मिकता के साथ जुड़कर हर बाधा को दूर किया जा सकता है ।इसके लिए जरूर है कि इंसान को अपने जीवन में हर दिन अपने लिए कुछ नया करने की सीख लेकर आगे बढ़ना होगा। तभी समाज में बदलाव संभव है। इस अवसर पर संस्थान के प्रिंसिपल ने अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित अपराजिता कार्यक्रम की सराहना की और कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से आज की युवा पीढ़ी में उनकी मानसिकता में बदलाव आता है और नए रक्त का संचार होता है।