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Solan: नालागढ़ में सुनाया शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग

नालागढ़ के चोए वाले बाबा भारती शिव मंदिर में चल रही श्री रामकथा के तीसरे दिन कथा व्यास आचार्य पंडित राधे मोहन कण्व ने कल की कथा को आगे बढ़ाते हुए भगवान शिव-पार्वती के विवाह का मनोहारी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सती द्वारा राजा दक्ष के यज्ञ में कूद कर जान देने के बाद उनका पुनर्जन्म पर्वतराज हिमालय के घर हुआ था। पर्वतराज हिमालय की घोर तपस्या के बाद माता जगदंबा प्रकट हुईं और उन्हें बेटी के रूप में उनके घर में अवतरित होने का वरदान दिया। इसके बाद माता पार्वती हिमालय के घर अवतरित हुईं। बेटी के बड़ी होने पर पर्वतराज को उनकी शादी की चिंता सताने लगी। माता पार्वती बचपन से ही बाबा भोलेनाथ की अनन्य भक्त थीं। एक दिन पर्वतराज के घर महर्षि नारद पधारे और उन्होंने भगवान भोलेनाथ के साथ पार्वती के विवाह का संयोग बताया। नंदी पर सवार भोलेनाथ जब भूत-पिशाचों के साथ बारात लेकर पहुंचे तो उसे देखकर पर्वतराज और उनके परिजन चौंक गए, लेकिन माता पार्वती ने खुशी से भोलेनाथ को पति के रूप में स्वीकार कर लिया। 10 जून से शुरू यह कथा 18 जून तक चलेगी। कथा का समय प्रतिदिन सायं 3 बजे से सायं 6 बजे तक है। इसके बाद सभी के लिए प्रसाद रूपी भंडारे की व्यवस्था है। आज की कथा में जगतराम शर्मा, दिनेश शर्मा , लक्ष्मी नारायण शर्मा, बिमला देवी, दर्शना बस्सी, निर्मला शर्मा, प्रेमलता शर्मा, गीता शर्मा, प्रीति शर्मा, सरोज रतन , ब्रह्म दास तथा अन्य श्रद्धालु उपस्थित थे।

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