निक्कूवाल के ग्रीन वेली में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन आचार्य नीलकंठ कौशल ने परीक्षित के मोक्ष का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि परीक्षित पुत्र जनमेजय ने महल की सुरक्षा कड़ी कर दी थी। इसके बावजूद तक्षक फूलों में सूक्ष्म रूप बनाकर महल के अंदर पहुंच गया और ऋषि के श्राप को सत्य किया। कथा के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।