सच्चा मुसलमान वही है, जो हजरत मोहम्मद साहब के बताए हुए रास्ते पर चले। हजरत मोहम्मद ने लोगों को इंसानियत, प्यार-मोहब्बत और आपसी भााईचारे का पढ़ाया। यह बात पंजाब के शाही इमाम मौलाना मोहम्मद उसमान ने नाहन के ईदगाह मैदान में आयोजित पयाम-ए-इंसानियत जलसा में कही। अंजुमन इस्लामिया नाहन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में मुस्लिम समुदाय के लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। लोग तड़के से ही शाही इमाम के कार्यक्रम में आने का इंतजार कर रहे थे। दोपहर बाद जब वह कार्यक्रम में पहुंचे तो लोगों ने उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया। नाहन के विधायक अजय सोलंकी ने उनका कार्यक्रम में पहुंचने पर अंजुमन इस्लामिया की ओर से सम्मानित किया। अपने संबोधन में मौलाना मोहम्मद उसमान ने मोहम्मद साहब को याद करते हुए उनकी दी हुई शिक्षाओं के अनुसार अपना जीवन व्यतीत करने का संकल्प दोहराया और कहा कि इस्लाम धर्म आपसी भाईचारे और शांति का संदेश देता है। मोहम्मद साहब के कई किस्से भी उन्होंने मंच से सांझा किए और जोर दिया कि मोहम्मद साहब ने लोगों की हमेशा मदद की लेकिन उनका रंग, रूप, धर्म और जात देखे बगैर। शाही इमाम ने लोगों से आह्वान किया कि वह दिलों से नफरतें निकाल कर आपसी भाईचारे को मजबूत करें। शाही इमाम ने लोगों को मोहम्मद साहब के दिखाए रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल मोहब्बत की जमीन है, इसने अपनी संस्कृति और भाईचारे से देशभर के लोगों को प्रभावित किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मुसलमान महिलाओं ने हर दौर में इस्लाम की तरक्की और इसकी रक्षा में अद्वितीय भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि इस्लामी इतिहास में ऐसी महिलाओं की कहानियां भरी पड़ी हैं जिन्होंने न सिर्फ अपने घर-परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं, बल्कि समाज और उम्मत के लिए भी बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किए। इस अवसर पर अंजुमन इस्लामिया के प्रधान गुल मनवर उर्फ बॉबी अहमद, कैप्टन सलीम अहमद समेत हजारों लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान समुदाय और समाज के लिए बेहतर कार्य करने वाले लोगों को शाही इमाम ने सम्मानित किया। इनमें खान बहादुर वाहिद, पार्षद योगेश गुप्ता, मोहम्मद हाशमी, मुबारक अली, राकेश गर्ग पार्षद, मोहम्मद इकबाल, फजल-उर-रहमान, हाजी गुलाम साबिर, इकबाल, शाहनवाज खान, नसीम रावत, ईशान राव, जामा मस्जिद के मोहतमीम हाजी मुमताज खान, शमशेर गंज मस्जिद से इसरार अहमद, गुन्नुघाट मस्जिद से हाजी खलील अहमद, हरिपुर मस्जिद से मोहम्मद रफी, चिडावली मस्जिद से सनावर खान, मोहम्मद इशान, कोठडी से मोहम्मद वकील, साई से साई नसीम इसके अलावा लंगर तैयार करने वाले हाजी मुहम्मद तैयब, उनकी टीम और इंतकाल होने पर कब्र खोदने में सहयोग देने वाली सभी लोगों को सम्मानित किया गया।