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सिरमौर: नाहन में रंजिश भुलाकर गले मिले सिख और वाल्मीकि समाज, शोभायात्रा ने पेश की भाईचारे की मिसाल

हालिया तनाव के बीच नाहन में रविवार को महर्षि वाल्मीकि शोभायात्रा ने आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया। 23 अक्तूबर को वाल्मीकि चौक पर गेट लगाने के विवाद के बाद दोनों समुदायों के बीच तनाव और पत्थरबाजी की घटना सामने आई थी। इसके बावजूद शोभायात्रा के दौरान गोबिंदगढ़ में सिख और वाल्मीकि समाज के लोगों ने एक-दूसरे का स्वागत किया और गले मिलकर आपसी दूरियां कम करने का प्रयास किया। गोबिंदगढ़ में सिख समाज की ओर से शोभायात्रा में शामिल लोगों को खाने-पीने की सामग्री, फल और प्रसाद वितरित किया गया। वहीं, गुरुद्वारा साहिब के समीप पहुंचने पर वाल्मीकि समाज के लोगों ने गुरुवाणी चलाई। तनाव के बाद दोनों समुदायों के बीच सामने आई यह सद्भावपूर्ण तस्वीर शहर में चर्चा का विषय बनी रही। नाहन के वाल्मीकि नगर से निकली शोभायात्रा का शुभारंभ विधायक अजय सोलंकी ने किया। शोभायात्रा में भगवान महर्षि वाल्मीकि की आकर्षक झांकी और बच्चों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण रहीं। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे समुदाय के लोगों ने नृत्य कर उत्सव का उल्लास बढ़ाया। विधायक अजय सोलंकी भी शोभायात्रा के साथ गोबिंदगढ़ तक शामिल रहे। पूरे आयोजन के दौरान पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस की निगरानी में शोभायात्रा निर्धारित मार्ग से शांतिपूर्वक गुजरी। गोबिंदगढ़ पहुंचते ही बदला माहौल, गले मिलकर दिया सद्भाव का संदेश शोभायात्रा के गोबिंदगढ़ पहुंचने पर सिख समाज के लोगों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। खाने-पीने की सामग्री बांटने के साथ फलों की टोकरी और प्रसाद भेंट किया गया। दोनों समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे से मिलकर हालिया विवाद के कारण पैदा हुई तल्खी को पीछे छोड़ने का प्रयास किया। गुरुद्वारा साहिब के समीप पहुंचने पर वाल्मीकि समाज के लोगों ने गुरुवाणी चलाई। दोनों पक्षों के इस व्यवहार ने आपसी सम्मान और धार्मिक सद्भाव का संदेश दिया। वाल्मीकि चौक पर गेट लगाने को लेकर 23 अक्तूबर को दोनों समुदायों के बीच विवाद ने गंभीर रूप ले लिया था। इस दौरान पत्थरबाजी की घटना के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। स्थिति को देखते हुए उपायुक्त के आदेश पर शोभायात्रा का रूट बदल दिया गया था। इससे शोभायात्रा के पारंपरिक मार्ग को लेकर मतभेद सामने आए और दोनों समुदायों के बीच सहमति बनाने की आवश्यकता महसूस हुई। शोभायात्रा के मार्ग को लेकर विवाद सुलझाने के लिए दोनों समुदायों के प्रबुद्ध लोगों की बैठक एसपी कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक में विधायक अजय सोलंकी और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पारंपरिक रूट बहाल करने पर सहमति बनी। इसके बाद शोभायात्रा को पुराने मार्ग से निकालने का निर्णय लिया गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में शोभायात्रा गोबिंदगढ़ से गुजरी और कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। हालिया तनाव के बाद निकली इस शोभायात्रा में सबसे अहम संदेश संवाद, आपसी सम्मान और सामाजिक सौहार्द का रहा। गोबिंदगढ़ में सिख और वाल्मीकि समाज के लोगों का एक-दूसरे का स्वागत करना और गले मिलना इस बात का प्रतीक बना कि मतभेदों को बातचीत और सहयोग से दूर करने का प्रयास किया जा सकता है।

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