लोगों की थाली तक पहुंचने वाले मीट की सुरक्षा को लेकर सिरमौर जिला मुख्यालय नाहन में सवाल उठने लगे हैं। शहर में स्लाटर हाउस पर पांच साल से ताले लटके हैं, जबकि मीट विक्रेता अपने स्तर पर बकरों और सुअरों का कटान कर मीट बेच रहे हैं। पशुओं के स्वास्थ्य की जांच से लेकर कटान के बाद मीट की चिकित्सकीय पड़ताल तक की पुरानी व्यवस्था बहाल नहीं हो पाई है। कोरोना काल में मीट विक्रेताओं को दी गई अस्थायी छूट पांच साल बाद भी जारी रहने से नगर परिषद की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी हो गया है कि बाजार में बिकने वाले मीट की गुणवत्ता और पशुओं के स्वास्थ्य की जांच सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान में क्या व्यवस्था लागू है। नाहन में पहले पशुओं के कटान और मीट की बिक्री के लिए निर्धारित व्यवस्था थी। पशुओं को कटान से पहले पशु चिकित्सालय ले जाया जाता था, जहां उनके स्वास्थ्य की जांच की जाती थी। जांच के बाद पशु पर मोहर लगाई जाती थी। इसके बाद सुबह स्लाटर हाउस में दोबारा जांच होती थी। चिकित्सक मोहर और पशु की स्थिति देखने के बाद ही कटान की अनुमति देता था। कटान के बाद पशु के अंगों की भी जांच की जाती थी, ताकि बीमार या अनुपयुक्त पशु का मीट लोगों तक न पहुंचे। लेकिन वर्तमान में इस व्यवस्था के ठप होने से जांच और निगरानी की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कोरोना काल में संक्रमण संबंधी परिस्थितियों के चलते नगर परिषद ने मीट विक्रेताओं को अपने स्तर पर पशुओं का कटान करने की छूट दी थी। उस समय इसे अस्थायी व्यवस्था के रूप में लागू किया गया था, लेकिन हालात सामान्य होने के बाद भी स्लाटर हाउस दोबारा शुरू नहीं हो सके। नाहन में पहले बकरों और सुअरों के कटान के लिए अलग-अलग स्लाटर हाउस थे। बकरों के कटान के लिए बने स्लाटर हाउस में हलाल और झटका पद्धति के अनुसार कटान की अलग व्यवस्था भी थी। मीट विक्रेता प्रत्येक पशु के कटान के लिए नगर परिषद को निर्धारित शुल्क देते थे। पशु चिकित्सक की जांच और अनुमति के बाद ही कटान किया जाता था। इस व्यवस्था का उद्देश्य पशुओं के स्वास्थ्य की जांच करना और यह सुनिश्चित करना था कि बीमार पशु का मीट बाजार में न बिके। अब दुकानदारों की ओर से अपने स्तर पर कटान किए जाने के कारण यह सवाल उठ रहा है कि स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए जरूरी जांच किस तरह सुनिश्चित की जा रही है। नाहन शहर में बकरे, सुअर, मुर्गे और मछली का मीट बेचने वाली करीब 15 से 18 दुकानें हैं। इतनी दुकानों पर बिकने वाले मीट की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और जरूरी चिकित्सकीय जांच महत्वपूर्ण है। स्थानीय स्तर पर पुरानी व्यवस्था बहाल नहीं होने से यह स्पष्ट होना जरूरी है कि वर्तमान में पशुओं के स्वास्थ्य और मीट की गुणवत्ता की जांच किस तरह की जा रही है। यह मामला केवल स्लाटर हाउस के बंद होने तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से भी जुड़ा है। नगर परिषद नाहन की अध्यक्ष उपमा धीमान ने कहा कि शहर में लोगों की सेहत से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि नई नगर परिषद के गठन के साथ ही सदन में स्लाटर हाउस को दोबारा संचालित करने का प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। इसे जल्द लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि व्यवस्था बहाल होने के बाद मनमाने तरीके से पशुओं का कटान नहीं हो पाएगा। अब देखना होगा कि नगर परिषद कब तक स्लाटर हाउस को दोबारा शुरू कर पशुओं की जांच, नियमानुसार कटान और मीट की गुणवत्ता की निगरानी की व्यवस्था बहाल करती है।