हिमाचल प्रदेश में सूखते प्राकृतिक जलस्रोतों और गर्मियों में बढ़ती पानी की समस्या से निपटने के लिए उत्तराखंड के जल संरक्षण मॉडल को अपनाने की तैयारी है। उत्तराखंड में जलस्रोतों के पुनर्जीवन और जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण का अध्ययन कर लौटी हिमाचल प्रदेश जल प्रबंधन बोर्ड की सात सदस्यीय टीम ने प्रदेश में जल संरक्षण के काम को संगठित और समन्वित तरीके से आगे बढ़ाने की जरूरत बताई है। नाहन में जल शक्ति विभाग के अधीक्षण अभियंता कार्यालय में पत्रकारवार्ता में भूजल संगठन एवं जल प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष शशि शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सोच के अनुरूप प्रदेश में जल प्रबंधन को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से सात सदस्यीय दल उत्तराखंड में सारा परियोजना के तहत किए जा रहे कार्यों का अध्ययन करने गया था। शशि शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड में जलस्रोतों और जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण को लेकर किए जा रहे कार्यों से हिमाचल सीख लेगा। इन अनुभवों को प्रदेश की भौगोलिक और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश के 12 जिलों में प्राचीन बावड़ियों और अन्य पारंपरिक जलस्रोतों को चिन्हित किया जा रहा है। विकास योजनाओं के कारण प्रभावित हुए पुराने जलस्रोतों के संरक्षण और संवर्धन पर भी काम किया जाएगा। शशि शर्मा के अनुसार हिमाचल में जल प्रबंधन बोर्ड का गठन वर्ष 1998 में हुआ था, लेकिन अपेक्षित स्तर पर काम नहीं हो पाया। अब मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में बोर्ड को सक्रिय कर जलस्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधीक्षण अभियंता राजीव महाजन ने बताया कि उत्तराखंड में वाटरशेड विभाग वर्ष 1982 में बना था। विभिन्न विभागों के जल संरक्षण कार्यों को व्यवस्थित करते हुए वर्ष 2023 में सारा परियोजना शुरू की गई। इसके तहत अब तक करीब आठ करोड़ रुपये के कार्य हो चुके हैं। टीम ने उत्तराखंड के हेवल नदी मॉडल का भी अध्ययन किया। इस मॉडल की नीति आयोग सहित जर्मन और लंदन सरकारों ने सराहना की है। उत्तराखंड में एक नदी को आधार बनाकर उससे जुड़ी सहायक नदियों और जलधाराओं को भी संरक्षण व्यवस्था में शामिल किया जाता है। इससे किसी एक जलस्रोत तक सीमित रहने के बजाय पूरे जलग्रहण क्षेत्र को एक इकाई के रूप में विकसित किया जाता है। राजीव महाजन ने कहा कि हिमाचल में विभिन्न विभागों ने जल संरक्षण के लिए कई कार्य किए हैं, लेकिन ये काम अब तक अलग-अलग तरीके से हुए हैं। अब सभी संबंधित विभागों और एजेंसियों को एक साथ जोड़कर समन्वित मॉडल तैयार किया जाएगा। उत्तराखंड की पूरी अध्ययन रिपोर्ट सरकार के समक्ष रखी जाएगी। उत्तराखंड गए सात सदस्यीय दल में शशि शर्मा, बोर्ड निदेशक मंडल के सदस्य सुरेंद्र सेठी और पवन ठाकुर, अधीक्षण अभियंता राजीव महाजन, अधिशासी अभियंता पांवटा जितेंद्र ठाकुर तथा मंडी से सहायक अभियंता सुशील ठाकुर और सूर्य ठाकुर शामिल रहे।