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ग्राउंड रिपोर्ट: सिरमौर में दिव्यांगों की परीक्षा ले रहा मेडिकल! नाहन में बोर्ड नहीं, ओपीडी की कतारों में हो रही जांच

नाहन (सिरमौर)। सिरमौर जिले के दिव्यांगजनों के लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाना किसी परीक्षा से कम नहीं रह गया है। सरकार जहां दिव्यांगों को सुविधाएं देने के दावे कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि एक मेडिकल प्रमाण पत्र के लिए उन्हें सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर मेडिकल कॉलेज नाहन पहुंचना पड़ रहा है। यहां भी राहत नहीं मिलती। चिकित्सकों की भारी कमी के कारण दिव्यांग मेडिकल बोर्ड नियमित रूप से नहीं बैठ पा रहा, जिससे दिव्यांगों को सामान्य मरीजों के साथ ओपीडी की लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी जांच करवानी पड़ रही है। हालात इतने खराब हैं कि कई बार दिव्यांगों को एक बार नहीं, बल्कि दो, तीन और पांच-पांच बार तक नाहन के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और शारीरिक रूप से असहाय लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ गई है। सिरमौर जिले में दिव्यांगता मेडिकल की मुख्य सुविधा मेडिकल कॉलेज नाहन में ही उपलब्ध है। हालांकि कुछ मामलों में सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में भी मेडिकल बोर्ड बैठता है। ऐसे में राजगढ़, हरिपुरधार, नौहराधार, संगड़ाह, शिलाई, ददाहू, पच्छाद, सराहां, बड़ू साहिब, चांदनी समेत दुर्गम क्षेत्रों से दिव्यांगजन घंटों का सफर तय कर यहां पहुंचते हैं। कई दिव्यांगों की शारीरिक स्थिति ऐसी नहीं होती कि वे बस से सफर कर सकें। मजबूरी में उन्हें टैक्सी या निजी वाहन किराये पर लेना पड़ता है, जिस पर हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं। अधिकांश मामलों में उनके साथ दो-दो परिजन भी आते हैं, जिससे खर्च और बढ़ जाता है।

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