श्रावण मास और गुप्त नवरात्र के पावन अवसर पर सरकाघाट स्थित ब्रह्मलीन श्री शिवगिरी जी महाराज की तपोस्थली शिव मंदिर में गुरुवार को शिव महापुराण कथा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा और ग्रंथ स्थापना के साथ हुआ। धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया। महंत श्री लक्ष्मी नारायण गिरि और शिव मंदिर कमेटी के सान्निध्य में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत कलश यात्रा से हुई। इसके बाद व्यासपीठ पर विराजमान कथावाचक पंडित जितेंद्र सांख्यान आचार्य का श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के जयकारों और मंगल गीतों के साथ स्वागत किया। कथा के प्रथम दिवस पंडित जितेंद्र सांख्यान ने मंगलाचरण के साथ प्रवचन प्रारंभ करते हुए भगवान शिव की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि संतों का सान्निध्य, ईश्वर का स्मरण और सद्गुरु की शरण ही मानव जीवन को सफल बनाने का मार्ग है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने और भगवान शिव की भक्ति से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वेदों, शास्त्रों और गुरु परंपरा के अनुसार सच्चे संतों की शरण में जाकर ही मनुष्य को सुख, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रद्धा, समर्पण और सत्संग का मार्ग सर्वोत्तम माना गया है। शिव मंदिर कमेटी के अध्यक्ष महंत श्री लक्ष्मी नारायण गिरि ने बताया कि शिव महापुराण कथा 24 जुलाई तक प्रतिदिन आयोजित होगी। उन्होंने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से कथा में शामिल होकर धर्म लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया।