बरसात के मौसम में मंडी जिला में सांप के काटने के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। इस सीजन में अब तक सर्पदंश के सात मामले सामने आ चुके हैं। राहत की बात यह है कि सभी लोगों ने समय रहते अस्पताल पहुंचकर उपचार करवाया, जिससे उनकी जान बचाई जा सकी। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ने और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने की सलाह दी है। सीएमओ मंडी डॉ. दिनेश ठाकुर ने बताया कि बारिश के मौसम में सांपों के बिलों और ठिकानों से बाहर निकलने के कारण सर्पदंश की घटनाएं बढ़ना आम है। मंडी जिला में करीब 70 से 80 प्रतिशत सांप जहरीले नहीं होते। इसके बावजूद सांप के काटने के बाद यह तय करना मुश्किल होता है कि सांप जहरीला था या नहीं। ऐसे में घरेलू उपचार या झाड़-फूंक पर निर्भर रहना जानलेवा हो सकता है। उन्होंने कहा कि जहरीले सांप के काटने की स्थिति में समय पर सही चिकित्सा उपचार बेहद जरूरी है। झाड़-फूंक करने वालों के पास इसका इलाज नहीं होता। उपचार में देरी होने पर मरीज की जान भी जा सकती है। सीएमओ ने बताया कि मंडी जिला के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में एंटी स्नेक वीनम (ASV) उपलब्ध है। यह दवा चिकित्सकों की निगरानी में मरीज को दी जाती है। इसलिए सांप के काटने की स्थिति में बिना समय गंवाए मरीज को नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए। सीएमओ ने लोगों को सर्पदंश के बाद किए जाने वाले कुछ पारंपरिक उपायों से भी बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कई लोग सांप के काटे स्थान को चूसने या उस पर चीरा लगाने की कोशिश करते हैं, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि काटे गए स्थान पर किसी साफ कपड़े से हल्का बांधाव किया जा सकता है, लेकिन घाव के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। मरीज को चलाने के बजाय उसे शांत रखते हुए जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि बारिश के मौसम में सावधानी बरतें और सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय वैज्ञानिक और चिकित्सकीय उपचार को प्राथमिकता दें।