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Mandi: मंडी में अमर उजाला की ओर से सम्मान समारोह आयोजित, निजी और सरकारी स्कूलों के मेधावियों को किया गया सम्मानित

जिला मुख्यालय के कांगणीधार स्थित संस्कृति सदन में अमर उजाला की ओर से वीरवार भविष्य ज्योति सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में सोलन के 27 निजी और राजकीय स्कूलों के नौवीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा के करीब 600 मेधावी छात्र-छात्राओं को मुख्य अतिथि उपायुक्त अपूर्व देवगन और विशिष्ट अतिथि एडीएम डॉ. मदन कुमार ने संयुक्त रूप से सम्मानित किया। अतिथियों से सम्मान पाकर मेधावियों के चेहरे खिल उठे और पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। समारोह में न सिर्फ मेधावियों के सपनों को नई उड़ान मिली, बल्कि अधिकारियों ने उनके उज्ज्वल भविष्य और कॅरिअर से जुड़े अहम टिप्स भी साझा किए। इस अवसर पर मुख्य अतिथि उपायुक्त अपूर्व देवगन उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने एक दिन के लिए डीसी रही अलीशा का जिक्र करते हुए कहा कि 99.57 प्रतिशत अंक प्राप्त करना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। इसके पीछे विद्यार्थियों की प्रतिभा, अनुशासन, कठिन परिश्रम और निरंतर प्रयास छिपे हैं। कहा कि अच्छे अंक और पुरस्कार सफलता की कहानी का अंत नहीं होते, बल्कि यह जीवन की लंबी यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मात्र हैं। उन्होंने कहा कि अंक किसी व्यक्ति की पूरी क्षमता और पहचान को परिभाषित नहीं करते। जीवन में आगे बढ़ने के लिए निरंतर सीखना, मेहनत करना और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना अधिक महत्वपूर्ण है। किसी विद्यार्थी ने अधिक अंक प्राप्त किए होंगे और किसी ने अपेक्षाकृत कम, लेकिन सफलता का वास्तविक पैमाना यह है कि व्यक्ति अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करता रहे। उपायुक्त ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें अपनी उपलब्धियों पर गर्व करना चाहिए, लेकिन यहीं रुकना नहीं चाहिए। जीवन में आगे भी कई चुनौतियां और अवसर आएंगे, जिनका सामना आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर करना होगा। उन्होंने कहा कि हर विद्यार्थी में आगे बढ़ने और अपनी अलग पहचान बनाने की क्षमता है। आवश्यकता केवल अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध रहने और निरंतर प्रयास करते रहने की है। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी प्रतिभा और ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देने के लिए करें। एडीएम डॉ. मदन कुमार ने सम्मानित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके गले में सजा मेडल केवल धातु का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनकी कड़ी मेहनत, लगन, संघर्ष और जागकर बिताई गई अनगिनत रातों का प्रतीक है। कहा कि विद्यार्थियों की इस सफलता में उनके अभिभावकों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने विद्यार्थियों से भविष्य में भी इसी समर्पण और मेहनत के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। कहा कि जीवन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता और कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने युवाओं से नशे और अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर देश व समाज के नवनिर्माण में अपना योगदान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम में विद्यापीठ शिमला मुख्य सहयोगी की भूमिका में रहा। इसके साथ ही आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी बद्दी, बाहरा यूनिवर्सिटी वाकनाघाट सोलन ने भी सहयोग किया। इसके साथ जिला मंडी से एन एफ सी आई, मांडव डेंटल केयर, जोगिंद्र पाल रूपेश कमार नगचला बर्तन, जे एम एम इंफ्राकोन एवं महावीर पब्लिक स्कूल सुंदरनगर भी सह सहयोगी की भूमिका रहे।

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