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लडभड़ोल: डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा सिविल अस्पताल, रात्रि सेवाओं के अभाव में मरीज बेहाल

लडभड़ोल तहसील क्षेत्र का एकमात्र सिविल अस्पताल इन दिनों अपनी बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टरों की भारी कमी के चलते सुर्खियों में है। स्थिति यह है कि क्षेत्र की 20 पंचायतों की करीब 25 हजार की आबादी के लिए बना यह अस्पताल खुद बीमार नजर आ रहा है। अस्पताल में डॉक्टरों के सात स्वीकृत पदों में से चार पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। जिससे पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था मात्र तीन डॉक्टरों के कंधों पर सिमट कर रह गई है। अस्पताल की लचर व्यवस्था का ताजा उदाहरण शुक्रवार रात को देखने को मिला। जिला कांगड़ा के ठंडोल निवासी एवं जिला परिषद सदस्य 24 वार्ड सुरेंद्र राणा रात करीब 10:30 बजे अपनी 75 वर्षीय बीमार माता शिवजु देवी को इलाज के लिए सिविल अस्पताल लडभड़ोल लेकर पहुंचे। उनकी माता को पेट में गंभीर शिकायत थी। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर उन्हें वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला, केवल नर्सिंग स्टाफ ही ड्यूटी पर तैनात था। जब सुरेंद्र राणा ने स्टाफ नर्स से डॉक्टर के बारे में पूछा तो उन्हें बताया गया कि डॉक्टर ऑन कॉल हैं। अस्पताल परिसर में डॉक्टर न होने के कारण मरीज को तत्काल उपचार नहीं मिल सका। उन्होंने अस्पताल की व्यवस्था पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि तीन डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद रात्रि सेवाओं में लोगों को डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के सरकारी दावे पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं। 100 बिस्तरों वाले अस्पताल में डॉक्टर का न होना जनता के साथ भद्दा मजाक है। इस बार में सीएमओ मंडी डॉ. दिपाली शर्मा ने बताया कि सिविल अस्पताल लडभड़ोल में अभी तीन डॉक्टर मौजूद हैं। रात्रि सेवाओं में डॉक्टर की अनुपस्थिति को लेकर संबंधित डॉक्टर से बात की जाएगी और व्यवस्था सुधारी जाएगी।

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