सीटू मजदूर संगठन की ओर से मनोनीत बोर्ड के गैर सरकारी सदस्य भूपेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड की 54वीं बैठक पिछले कल शिमला में बोर्ड के चेयरमैन नरदेव सिंह कंवर की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में अगले वित्त 2026-2027 का बजट पारित किया गया, जिसमें कुल 159 करोड़ खर्च करने का प्रावधान रखा गया जिसमें से 105 करोड़ रुपये मजदूरों के कल्याण के लिए तथा 55 करोड़ अन्य मद्दों के लिए हैं जबकि गत वर्ष कल्याण के लिए 160 करोड़ रुपये रखे गए थे लेकिन उसमें से मात्र 35 करोड़ ही जारी किए गए हैं जबकि पिछले चार साल के एक लाख से ज्यादा आवेदन पत्रों के 300 करोड़ रुपये से ज्यादा के क्लेम लंबित पड़े हैं। इसमें से पिछली दो बैठकों के निर्णयों के अनुसार इस माह के अंत तक पचास प्रतिशत लंबित क्लेम जारी करने का टारगेट तय किया गया था लेकिन मात्र दस हजार मजदूरों की वित्तिय सहायता ही जारी की गई है। भूपेंद्र सिंह ने कहा कि बोर्ड के अधिकारियों, कर्मचारियों और राजनैतिक ईच्छाशक्ति की कमी और श्रमिक विरोधी सोच के चलते पिछले तीन साल से मजदूरों के कल्याण के लिए निर्धारित बजट का 25-30 प्रतिशत भाग भी मजदूरों को सहायता के रूप में जारी नहीं हो रहा है जो बहुत ही चिंता का विषय है। इस पर भूपेंद्र सिंह व अन्य गैर सरकारी सदस्यों ने बैठक में अपनी नाराजगी जताते हुए पंजीकृत निर्माण मजदूरों को सभी लंबित वित्तिय सहायता अगले तीन महीने में जारी करने का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो सीटू से जुड़ी निर्माण मजदूर यूनियन के बैनर तले बोर्ड कार्यालय हमीरपुर का घेराव करेंगे।