अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या में पंजाबी और पहाड़ी गीतों की धूम रही। पंजाबी गायक रोहनप्रीत सिंह, पहाड़ी गायक रमेश ठाकुर, सारेगामा फेम अनुज शर्मा और लमन बैंड ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। वहीं, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के कलाकारों ने विभिन्न देशों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय संस्कृति के रंग बिखेरे। पंजाबी गायक रोहनप्रीत सिंह ने ‘दो गलां करिये प्यार दीयां’, ‘तू मान मेरी जान’, ‘तुझे नहीं दूं’ और ‘एक मुंडा पंजाबी’ सहित कई गीत प्रस्तुत किए। उनकी प्रस्तुतियों पर दर्शक झूम उठे और कार्यक्रम स्थल का माहौल उत्साह से भर गया। पहाड़ी गायक रमेश ठाकुर ने ‘सांसों की माला पे’, ‘कैरे झूरिए झूरना’, ‘एक तू ही मेरा प्यार ओ सपना’, ‘कोखै री होली तो कोखै’ और ‘घोर पोलू तेरा’ जैसे गीतों से समां बांधा। उनके पहाड़ी गीतों ने स्थानीय लोक संस्कृति की छटा बिखेरी। सारेगामा फेम अनुज शर्मा ने ‘एक हसीना थी, एक दीवाना था’, ‘ओम शांति ओम’, ‘बचना ऐ हसीनों लो मैं आ गया’ और ‘जवानी के हैं चार दिन’ जैसे लोकप्रिय गीत पेश किए। उनकी प्रस्तुति पर दर्शकों ने खूब उत्साह दिखाया। वहीं, लमन बैंड ने ‘बूंदा बरस पैइयां’ और ‘उत्तामिए तेरे लगा दांदे रा चाबा’ जैसे गीतों से खूब वाहवाही बटोरी। आईसीसीआर के कलाकारों ने विभिन्न देशों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को अंतरराष्ट्रीय कला और परंपराओं से रूबरू करवाया। पांचवीं सांस्कृतिक संध्या में लाहौल-स्पीति की विधायक अनुराधा राणा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। दशहरा उत्सव समिति के उपाध्यक्ष एवं उपायुक्त कुल्लू डॉ. अमित कुमार शर्मा ने उन्हें स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर एनएचपीसी के महाप्रबंधक रंजीत सिंह, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। पांचवीं सांस्कृतिक संध्या में दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी। लाल चंद प्रार्थी कला केंद्र का पंडाल शाम करीब 7:30 बजे ही पूरी तरह भर गया। इसके बाद प्रवेश द्वार के बाहर अंदर जाने के लिए लंबी कतारों में खड़े दर्शकों को जगह नहीं मिल सकी। कई दर्शकों को अपने पसंदीदा कलाकारों की प्रस्तुतियां देखे बिना ही वापस लौटना पड़ा। कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ ने कलाकारों की लोकप्रियता और कुल्लू दशहरा की सांस्कृतिक संध्या के प्रति लोगों के उत्साह को दर्शाया।