अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव संपन्न हो चुका है और अधिकतर देवी-देवता अपने-अपने देवालयों की ओर रवाना हो गए हैं। हालांकि, ढालपुर मैदान में अभी भी अलग-अलग घाटियों के 27 देवी-देवता अपने अस्थायी शिविरों में विराजमान हैं। बुधवार सुबह हारियानों ने देव परंपराओं और विधि-विधान के अनुसार अपने आराध्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की। इस दौरान ढालपुर मैदान में ढोल-नगाड़ों और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज सुनाई देती रही। देव समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना कर देव परंपराओं का निर्वहन किया। दशहरा उत्सव के समापन के बाद भी ढालपुर मैदान में देव आस्था और परंपराओं का यह सिलसिला जारी है। बताया जा रहा है कि बुधवार दोपहर बाद तक ढालपुर मैदान में विराजमान ये देवी-देवता भी अपने-अपने देवालयों की ओर लौट जाएंगे। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के बाद ढालपुर मैदान में देवी-देवताओं की मौजूदगी का सिलसिला भी समाप्त हो जाएगा।