हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड के पेंशनरों ने सरकार और बोर्ड प्रबंधन के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की है। विद्युत पेंशनर फोरम ज्वाली इकाई की मासिक बैठक सोमवार को कल्पना पैलेस, मैरा में इकाई प्रधान राम लुभाया की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में पेंशनरों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हुए लंबित मामलों के जल्द समाधान की मांग उठाई गई। फोरम के राज्य उपाध्यक्ष पवन मोहल ने कहा कि विद्युत बोर्ड प्रबंधन की ओर से 4 अप्रैल 2026 को जारी आदेश के अनुसार वर्कचार्ज पद पर की गई सेवा अवधि को सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाले लीव इनकैशमेंट, ग्रेच्युटी और अन्य वित्तीय लाभों में शामिल नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस फैसले से कर्मचारियों को पेंशन सहित अन्य लाभों में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। पवन मोहल ने कहा कि इस आदेश के खिलाफ हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी। उन्होंने मांग की कि वर्कचार्ज अवधि को पहले की तरह सभी वित्तीय लाभों के लिए मान्य रखा जाए। उन्होंने कहा कि इस फैसले से कर्मचारियों की मूल पेंशन में प्रतिमाह करीब 1000 से 2500 रुपये तक का नुकसान होने की आशंका है। बैठक में पुरानी पेंशन योजना (OPS) का मुद्दा भी उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश के अन्य सरकारी विभागों के करीब 1.36 लाख कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिल चुका है, लेकिन विद्युत बोर्ड कर्मचारियों को अभी तक इसका लाभ नहीं मिला है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मांग की कि विद्युत बोर्ड में भी जल्द पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए। पेंशनरों ने कहा कि 1 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को संशोधित लीव इनकैशमेंट, ग्रेच्युटी और संशोधित कम्यूटेड पेंशन की राशि अभी तक जारी नहीं हुई है। इसके अलावा 65 से 70 वर्ष आयु वर्ग के पेंशनरों की लंबित बकाया राशि का भुगतान भी जल्द करने की मांग की गई। पेंशनरों ने कहा कि सितंबर 2025 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी अभी तक लीव इनकैशमेंट और ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं मिला है। बैठक में विद्युत बोर्ड में ठेकेदारों के माध्यम से की जा रही भर्तियों का भी विरोध किया गया। वक्ताओं ने कहा कि बोर्ड में करीब 13 हजार स्वीकृत पद खाली पड़े हैं, लेकिन नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1990 में बोर्ड में करीब 43 हजार कर्मचारी कार्यरत थे और उपभोक्ताओं की संख्या करीब 9 लाख थी। वर्तमान में कर्मचारियों की संख्या घटकर लगभग 12 हजार रह गई है, जबकि उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर करीब 29 लाख पहुंच गई है। ऐसे में नियमित नियुक्तियां जरूरी हैं। बैठक में संयुक्त सचिव सुखदेव धीमान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष चैन सिंह पठानिया, कमल सिंह ठाकुर, मुख्य सलाहकार मदन दीवान, ऑडिटर कृष्ण धीमान, कोषाध्यक्ष केवल सिंह चौधरी, संगठन सचिव पूरन सिंह, गणेश चौधरी, उपाध्यक्ष कीकर सिंह, जिला पेंशनर फोरम से मोहिंदर सिंह ठाकुर सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।