गुरु रविदास की 648वीं जयंती को लेकर रविवार को गुरु रविदास सभा नेरना द्वारा उपतहसील राजा का तालाब में विशाल शोभा यात्रा निकाली गई।वहीं मंदिर परिसर में सत्संग सम्मेलन का आयोजन किया गया।रविवार दोपहर बाद मंदिर के मुख्य पुजारी जरम सिंह व अन्य पदाधिकारियों ने मुख्य मंदिर में गुरु रविदास महाराज की पूजा अर्चना की।इस मौके पर गुरुद्वारा नानक जोत साहिब कुठण्डल के सेवादार संत बाबा लवप्रीत सिंह ने अपने प्रवचन से साध संगत को निहाल करते हुए संत शिरोमणि गुरु रविदास के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पृथ्वी पर जब जब महापुरुष जन्म लेते हैं। तब तब हर तरफ ज्ञान की गंगा से आमजन का उद्धार हो जाता है।उन्होंने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज ज्ञान की पराकाष्ठा की धुरी रहे हैं। उन्होंने समाज में फैली छुआ छूत की बीमारी को उन्होंने अपने ज्ञान से दूर किया।जबकि दीन दुखियों को प्रभु शरण ग्रहण करने की प्रेरणा दी।उन्होंने दुनिया को सच के मार्ग चलने के लिए प्रेरित किया।वहीं समाज को हर पल उस परम परमेश्वर की महिमा का गुणगान करते हुए दीन दु:खियों की सेवा करने की राह दिखाई। इस बीच रविवार लगभग 12 बजे गुरु रविदास मुख्य मंदिर नेरना से विशाल रथ पर गुरु रविदास के चित्र को फूल मालाओं से सजाकर जाझवां, गारन, वरोह तक शोभा यात्रा निकाली गई।।इस अवसर पर उपप्रधान मास्टर ज्ञान चन्द, अमर सिंह, चरण दास, बिहारी लाल, राकेश कुमार, चरण सिंह, राकेश कुमार, हरबंस लाल, जोगिंद्र सिंह, करतार सिंह, कुलदीप कुमार, साधू राम, देस राज, प्रेम सिंह, जगदीश जग्गू, सुरेश कुमार, मंदिर पुजारी जर्म सिंह, गोरखी राम, जीत सिंह, देव राज, पृथी सिंह, विधि सिंह, नरेश कुमार, तुलसी दास, राजकुमार, चंद लाल, लता देवी, संध्या देवी, आशा कुमारी, उर्मिला देवी, माया देवी, ललिता देवी, संतोष कुमारी, सुशीला देवी, बीना देवी, शीला देवी सहित अन्य गुरु प्रेमी भक्त शामिल रहे।मंदिर के मुख्य पुजारी जरम सिंह ने बताया 12 फरवरी मंदिर में सुबह दस बजे झंडा रस्म, सत्संग व लंगर का भी आयोजन किया जायेगा।