उपमंडल सुजानपुर की ऐतिहासिक होली उत्तर भारत की उन विरासतपूर्ण परंपराओं में शामिल है, जिनमें रंग, भक्ति और रियासती दौर के वैभव का अद्भुत संगम दिखाई देता है। यहां मनाया जाने वाला होली उत्सव ब्रज की तर्ज पर होता है। इसमें राधा-कृष्ण भक्ति की झलक, पारंपरिक लोक संस्कृति और रियासतों की गरिमा आज भी परंपराओं में झलकती है। इस ऐतिहासिक परंपरा की शुरुआत कटोच वंश के शासक महाराजा संसार चंद ने अपने शासनकाल के दौरान की थी। तब से लेकर आज तक यह परंपरा राजशाही काल की गरिमा को संजोए हुए निरंतर आगे बढ़ रही है। होली उत्सव का विधिवत शुभारंभ ऐतिहासिक मुरली मनोहर मंदिर में होता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सुजानपुर की सांस्कृतिक पहचान का भी प्रमुख केंद्र है। होली के दिन प्रातःकाल विशेष पूजा-अर्चना के साथ कार्यक्रम का आरंभ होता है। मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति ने विपरीत दिशा में मुरली पकड़ी हुई है। मंदिर के पुजारी रवि नंदन शास्त्री कहते हैं कि महाराजा संसार चंद ने एक लाख की मुद्रा से इस मंदिर का निर्माण करवाया था, जिस वजह से इसे लख टकिया मंदिर कहा जाता है।